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मुजफ्फरनगर जेल में मुस्लिमों के साथ 32 हिंदू कैदी भी रख रहे हैं रोजा

मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगों से हिंदुओं और मुस्लिमों में मतभेद बढ़ गए थे। लेकिन, रमजान के इस मौके पर हिंदू-मुस्लिम कैदी रोजा रखकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं।

Author May 30, 2017 4:40 PM
इफ्तार के लिए कैदियों को दूध और मेवे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुजफ्फरनगर की एक जेल में इन दिनों रमजान के दौरान 1,174 मुस्लिमों के साथ करीब 32 हिंदू कैदी भी पूरे दिन का उपवास ‘रोजा’ रख रहे हैं। जेल अधीक्षक राकेश सिंह के मुताबिक, जेल अधिकारियों ने रोजा रखने वाले कैदियों के लिए विशेष व्यवस्था की है। ‘इफ्तार’ के लिए उन्हें दूध और मेवे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कुल 2,600 कैदियों में से 1,174 मुस्लिम और 32 हिंदू कैदी रोजा रख रहे हैं।

रमजान के पवित्र मौके पर इस तरह की बानगी यूपी में पहली बार देखने को मिल रही है। यह वही मुजफ्फरनगर है, जहां सांप्रदायिक हिंसा में लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे। मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगों से हिंदुओं और मुस्लिमों में मतभेद बढ़ गए थे। लेकिन, रमजान के इस मौके पर हिंदू-मुस्लिम कैदी रोजा रखकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं।

बता दें कि इस बार रमजान यूपी में दूसरे रुप से भी खास होने जा रहा है। दरअसल, इस रमजान में रोजा रखने वालों के लिए आरएसएस की मुस्लिम शाखा इफ़्तार पार्टी आयोजित करेगी। लेकिन इस इफ़्तार पार्टी में अन्य इफ़्तार पार्टियों की तरह कबाब, पकौड़े, और मटन, चिकन कोरमा नहीं होगा, बल्कि इस पार्टी में रोजेदार एक ग्लास दूध पीकर रोजा तोड़ेंगे।

आरएसएस की मुस्लिम शाखा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक महिराज ध्वज सिंह ने कहा कि ये पहली बार हो रहा है कि रोजा रखने वाले मुस्लिम भाई दूध पीकर अपना रोजा तोड़ेंगे। इस अनोखी इफ़्तार पार्टी का मकसद गाय को बचाने संदेश देने के साथ ही गोमांस के सेवन से होने वाली बीमारियों के बारे में लोगों को जागृत करना है।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का गठन 2002 में RSS के तत्कालीन प्रमुख केएस सुदर्शन के प्रयासों के बाद किया गया था, इसका मकसद मुस्लिम समाज के लोगों तक संघ की पहुंच बनाना है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुताबिक मुस्लिम विद्वान भी मानते हैं कि गाय का दूध सेहत के लिए फायदेमंद है और दूध से बना घी दवा के जैसा काम करता है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का कहना है कि रमजान के दौरान गाय को बचाने का संदेश देने के लिए विशेष नमाज भी पढ़ा जाएगा।

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