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रवीश कुमार को धमकी देने वाले विकास के सिर पर कट्टर हिंदू नेताओं का हाथ, अरेस्ट पर नरसिंहानंद ने जारी किया था वीडियो

विकास का वीडियो तब आया था, जब डासना के मंदिर में मुसलमानों के जाने पर प्रतिबंध लगने के बावजूद असलम चौधरी नाम के एक नेता ने वहां जाने की घोषणा की थी। हालांकि बाद में वह मंदिर जाने से इंकार कर दिए थे।

डासना स्थित देवी मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती। (फोटो- ट्विटर हैंडल)

पिछले दिनों एक वीडियो जारी कर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को मारने की धमकी देने वाले विकास सहरावत उर्फ मलिक सहरावत पर कथित रूप से कट्टर हिंदू नेताओं का संरक्षण है। विकास उर्फ मलिक सहरावत को अप्रैल में उस समय गिरफ्तार कर लिया गया था, जब उन्होने वीडियो जारी कर कथित रूप से हिंसा करने की बात कही थी। विकास का वीडियो तब आया था, जब डासना के मंदिर में मुसलमानों के जाने पर प्रतिबंध लगने के बावजूद असलम चौधरी नाम के एक नेता ने वहां जाने की घोषणा की थी। हालांकि बाद में वह मंदिर जाने से इंकार कर दिए थे।

विकास सहरावत उर्फ मलिक ने 11 अप्रैल, 2021 को अपने फेसबुक पेज वीडियो पोस्ट किया था। इसमें पत्रकार रवीश कुमार और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अमानतुल्ला खान को मारने की धमकी दी थी। उसके वीडियो के पीछे की वजह डासना के मंदिर का विवाद थी। विकास उर्फ मलिक सहरावत की गिरफ्तारी के बाद शिव शक्ति धाम डासना के संत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने वीडियो जारी कर उसके प्रति अपना समर्थन जताया था।

इससे पहले यूपी के गाजियाबाद में मंदिर में पानी पीने गए एक बच्चे की पिटाई के मामले ने तूल पकड़ लिया था। अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक और शिव शक्ति धाम डासना के संत यति नरसिंहानंद सरस्वती का कहना था कि बच्चा मुस्लिम संप्रदाय का है और मंदिर में मुस्लिम संप्रदाय के लोगों के आने पर मनाही है। बाहर बोर्ड पर यह लिखा भी है। उनका कहना है कि जब मंदिर के बाहर नल है, सड़क पार करने पर नल है और पास ही स्थित पंचायत भवन में पानी पीने की सार्वजनिक व्यवस्था है, फिर भी वो लड़का मंदिर के भीतर पानी पीने क्यों आया?

इस मुद्दे को लेकर मीडिया के कुछ लोगों ने जब महंत से बात की तो उन्होंने कहा कि इस मंदिर में आसपास के कई गांवों के लोगों की श्रद्धा है और बड़ी संख्या में बहू-बेटियां दर्शन के लिए आती हैं, जिनके साथ ये लोग छेड़खानी करते हैं। उन्होंने कहा कि “अगर कोई हिन्दू लड़का इस तरह की हरकत करता है तो परिवार उसे डांटता है और चेतावनी देता है, लेकिन मुस्लिमों के मामले में ऐसा नहीं है और जब उनके युवकों की छेड़खानी की शिकायत लेकर उनके परिजनों के पास विरोध दर्ज कराया जाता था तो मुस्लिम समाज के कई लोग उसके बचाव में आ जाते थे, जिनमें कई बुजुर्ग भी होते थे। उन्होंने बताया कि इन्हीं चीजों से परेशान होकर ‘मुस्लिमो का प्रवेश वर्जित’ वाला बोर्ड लगाया गया है।”

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