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ज्ञानवापी मस्जिद: अंजुमन इंतजामिया कमेटी की अपील, जुमे की नमाज के लिए कम से कम लोग आएं

याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने दावा किया है कि शिवलिंग के अंदर 63 सेंटीमीटर का छेद पाया गया है। उन्होंने षड्यंत्र की आशंका जताई है।

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ज्ञानवापी मस्जिद केस (फोटो: पीटीआई)

देशभर में ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की चर्चा हो रही है और मामला कोर्ट में है। 30 मई को वाराणसी की अदालत इस मामले में सुनवाई भी करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी कोर्ट को कहा है कि वह 8 हफ्ते के अंदर इस पूरे मामले की सुनवाई करें और फैसला दें। वाराणसी कोर्ट ने मस्जिद के अंदर सर्वे का आदेश दिया था, जिसके बाद कोर्ट कमीशन का गठन हुआ और सर्वे की प्रक्रिया पूरी हुई।

सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट कमीशन ने वाराणसी अदालत को सौंपी। सर्वे खत्म होने के बाद तुरंत बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि वजू खाने में शिवलिंग मिला है। वहीं हिंदू पक्ष के दावे को नकारते हुए मुस्लिम पक्ष ने कहा कि जिसे हिंदू पक्ष शिवलिंग बता रहा है, वह केवल एक फव्वारा है, जो 10-12 सालों से वहां पर है। वहीं हिंदू पक्ष का दावा है कि शिवलिंग नंदी के सामने है और वह शिवलिंग ही है।

27 मई (शुक्रवार) को जुमे की नमाज है और विवाद के बीच अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने नमाजियों से अपील की है कि वे शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए मस्जिद में भारी संख्या में ना आए। कम से कम लोग जुमे की नमाज के लिए आए। इसके पहले भी मस्जिद कमेटी ने ऐलान किया था लेकिन भारी संख्या में नमाजी पहुंच गए थे। मस्जिद के आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं।

हिंदू पक्ष शिवलिंग मिलने के दावे के ठीक बाद कोर्ट पहुंच गया और कोर्ट से वजू खाने को सील करने की गुहार लगाई। कोर्ट ने भी शिवलिंग वाले स्थान को सील करने का आदेश दे दिया और उसकी सुरक्षा के आदेश दे दिए। मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया है। मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि अगर वजू खाने को ही सील कर दिया गया है तो फिर नमाज कैसे होगी? हालांकि कोर्ट ने नमाज पर कोई रोक नहीं लगाई है।

वहीं याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने आरोप लगाया है कि शिवलिंग के अंदर 63 सेंटीमीटर का छेद पाया गया है। जबकि सर्वे के वक्त यह महज 6 इंच का था। उन्होंने आशंका जताई कि षड्यंत्र किया जा रहा है और सबूत मिटाए जा सकते हैं। उन्होंने इसकी जांच की मांग की है।

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