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ज्ञानवापी केसः पार्क-सड़क या हवाई जहाज में नमाज अदा करेंगे तो क्या उसे मस्जिद कहने लगेंगे?- बोले VHP नेता, देखें- फिर क्या हुआ?

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनय शंकर तिवारी ने कहा कि 5 बहनें कोर्ट गईं और उन्होंने पूजा की इजाजत मांगी है।

ज्ञानवापी केसः पार्क-सड़क या हवाई जहाज में नमाज अदा करेंगे तो क्या उसे मस्जिद कहने लगेंगे?- बोले VHP नेता, देखें- फिर क्या हुआ?
काशी विश्वनाथ मंदिर धाम और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का दृश्य (फोटो- पीटीआई)

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा है और पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद के अंदर सर्वे हुआ और सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया कि वजू खाने में शिवलिंग मिला है। हालांकि हिन्दू पक्ष के दावे को मुस्लिम पक्ष ने नकार दिया और कहा कि जिसे हिंदू पक्ष शिवलिंग बता रहा है, वह केवल एक फव्वारा है। ज्ञानवापी मुद्दे को लेकर एक समाचार चैनल पर बहस चल रही थी, जिसमें एआईएमआईएम के प्रवक्ता वारिस पठान और वीएचपी प्रवक्ता विनय शंकर तिवारी मौजूद थे।

बहस के दौरान विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनय शंकर तिवारी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने वहां पर जुमे की नमाज के लिए 20 लोगों की संख्या तय की थी, लेकिन 700 से अधिक लोग नमाज के लिए पहुंच गए। कहां आराजकता है, सबको पता चल गया है। 1945 में भी वहां पूजा होती थी और 1991 में भी वहां पूजा होती थी। बाद में शासन द्वारा उसे बंद कराया गया। पूजा वहां पर होती रही है। पांच बहने कोर्ट गई हैं और जो भी कार्यवाही हो रही है वह कोर्ट कर रहा है। कोर्ट के अनुसार हो रहा है। इसलिए कार्यवाही वहां पर संविधान के अनुसार हो रही है।”

विनय शंकर तिवारी ने आगे कहा, “5 बहनें कोर्ट गईं और उन्होंने पूजा की इजाजत मांगी है, कि पूजा हम पहले रोज करते थे और वह इजाजत फिर से मिले। उसके बाद कोर्ट का आदेश सर्वे के लिए आया और सर्वे हुआ और सर्वे में वह सब कुछ खुल गया, जो शिव भक्त कहते थे। सर्वे में शिवलिंग भी आ गया, सर्वे में वह छत भी आ गई, तो अब तो कुछ बचा ही नहीं है।”

विनय शंकर तिवारी ने पूछा, “आप अगर सड़क पर नमाज अदा करते हैं तो सड़क को मस्जिद कहने लगेंगे? आप अगर हवाई जहाज में नमाज अदा करते हैं तो हवाई जहाज को मस्जिद कहने लगेंगे क्या? मैं कहता हूं कि वो बाबा विश्वनाथ की जगह है। वहां पर पूजा की इजाजत मिलनी चाहिए। पूरी की पूरी जगह बाबा विश्वनाथ की है, मंदिर की है और वह हिंदुओं को मिलना चाहिए।”

वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि बगैर वजू किए नवाज नहीं पढ़ी जा सकती। कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्थानीय डीएम याचिकाकर्ताओं का सहयोग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति दें, तो इसमें तालाब से वजू शामिल है। जब तक वज़ू न करे तब तक नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती। फव्वारा संरक्षित किया जा सकता है लेकिन तालाब खुला होना चाहिए।”

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