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उत्तर प्रदेशः दादरी, नोएडा, गाजियाबाद में होगा सूबे का पहला स्मार्ट औद्योगिक शहर

मल्टी मॉडल लॉजिस्टक हब को दादरी के तिलपता कंटेनर डिपो के पास बनाया जाएगा। जहां से फैक्टरियों में तैयार माल महज 12-14 घंटे में मुंबई बंदरगाह पहुंचाया जा सकेगा। साथ ही विदेशों से आयात होने वाला कच्चा माल, मशीनरी आदि भी इतने समय में मुंबई से यहां पहुंच सकेगी।

Author नोएडा। | May 23, 2018 5:42 AM
विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली यह टाउनशिप उद्योग स्थापित करने वालों को आकर्षित करेगी। देश के अलावा विदेशों से इस इलाके में काफी निवेश होने की उम्मीद है। इस तरह के औद्योगिक इलाकों से मेक इन इंडिया और इंवेस्ट इन इंडिया का आधार मजबूत होगा।

सिंगापुर, हांगकांग की तर्ज पर स्मार्ट औद्योगिक इलाके की दौड़ में दादरी-नोएडा-गाजियाबाद का 747 एकड़ इलाका अव्वल बनने जा रहा है। इसे देश के वैश्विक निर्माण एवं व्यापार केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। जहां विश्वस्तरीय औद्योगिक और रिहायशी सुविधाओं वाले इस इलाके में सीसीटीवी कैमरे, अत्याधुनिक सुरक्षा प्रबंध (इंटेलिजेंट सिक्योरिटी सिस्टम), सौर ऊर्जा, अत्याधुनिक कचरा निस्तारण व्यवस्था (ऑटोमैटिक वेस्ट कलेक्शन सिस्टम) आदि होंगे। उद्योग के साथ रिहायशी, हरित, संस्थागत, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों वाले इस शहर के चारों तरफ चारदीवारी होगी, जो इसे मौजूदा औद्योगिक महानगर नोएडा-ग्रेटर नोएडा से अलग पहचान देगा। डीएमआइसी इंटीग्रेटिड इंटस्ट्रियल टाउनशिप के नाम से तैयार हुए इस इलाके के 50 फीसद हिस्से में उद्योग लगेंगे। 11 फीसद रिहायश, 15 फीसद हरित क्षेत्र होगा। मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब से इस टाउनशिप को विकास की नई रफ्तार मिलेगी। आने वाले 3-5 सालों में इस इलाके में 50 हजार करोड़ रुपए का निवेश होने का अनुमान है।

डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर के जरिए मुंबई और दिल्ली के बीच माल का आवागमन शताब्दी रेल की रफ्तार जितना तेज हो जाएगा। कच्चे और तैयार माल के आने-जाने की सुविधा उद्योगों की तरक्की के लिए जरूरी है। इसको ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के नजदीक स्मार्ट औद्योगिक शहर बनाने की योजना तैयार की है। इसमें उप्र के पहले स्मार्ट औद्योगिक शहर के रूप में इस क्षेत्र को विकसित किया गया है। रिठौरी और घोड़ा बछेड़ी गांवों के आसपास बन रही इस टाउनशिप में सड़क, पानी-सीवर-बिजली की लाइनें आदि बिछाई जा चुकी हैं। उद्योग स्थापित करने के लिए एक हेक्टेयर एवं उससे बड़े भूखंडों की योजना में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

कुल चार तरह के उद्योग, हाईटेक, बॉयोटेक, अनुसंधान एवं विकास और आईटी यहां लगेंगे। एक हेक्टेयर एवं उससे बड़े क्षेत्रफल वाले औद्योगिक भूखंडों की कीमत ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक भूखंडों के बराबर रखी गई है। इस टाउनशिप में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की भागीदारी है। इस टाउनशिप के प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक महानगरों में लाइलाज हो चुके कचरा निस्तारण का यहां अनूठा प्रबंध किया गया है। कचरा निस्तारण के लिए भूमिगत लाइनें बिछी होंगी। इनमें घरों या फैक्टरियों से निकलने वाला अलग-अलग तरह का कचरा भरा जाएगा। भूमिगत पाइप पाइन से जुड़े पंप उस कचरे को खींचकर मानक के आधार पर निस्तारित कर देंगे।

क्या होगा खास

मल्टी मॉडल लॉजिस्टक हब को दादरी के तिलपता कंटेनर डिपो के पास बनाया जाएगा। जहां से फैक्टरियों में तैयार माल महज 12-14 घंटे में मुंबई बंदरगाह पहुंचाया जा सकेगा। साथ ही विदेशों से आयात होने वाला कच्चा माल, मशीनरी आदि भी इतने समय में मुंबई से यहां पहुंच सकेगी। लॉजिस्टिक हब और स्टेशन के बीच रेल लाइन से सीधा संपर्क होगा, जो उद्योगों से संबंधित माल-आवागमन को कम समय और कीमत में विदेशों तक पहुंचाने में मदद देगा। मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब को बोड़ाकी के पास विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित रेल टर्मिनल के रूप में बनाया जाएगा। जिसके आसपास अंतरराज्यीय बस डिपो, होटल, रेस्तरां, मेट्रो आदि की सुविधाएं होंगी। लोगों के आने-जाने के अलावा ठहरने की व्यवस्था वाला अलग परिसर यहां होगा।

“विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली यह टाउनशिप उद्योग स्थापित करने वालों को आकर्षित करेगी। देश के अलावा विदेशों से इस इलाके में काफी निवेश होने की उम्मीद है। इस तरह के औद्योगिक इलाकों से मेक इन इंडिया और इंवेस्ट इन इंडिया का आधार मजबूत होगा। मौजूदा औद्योगिक शहरों के मुकाबले डीएमआइसी इंटिग्रेडिट इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा बहुत अलग होगी।”

-बीके त्रिपाठी, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, ग्रेटर नोएडा

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