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नक्सली हमला: शेर मोहम्मद की सलामती की दुआ करते परिजन, मां को नाज है अपने बेटे शेर पर

छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में घायल जवानों में बुलंदशहर के शेर मोहम्मद भी शामिल हैं।

Author बुलंदशहर | April 26, 2017 2:08 AM
फरवरी में नक्सलियों के साथ सुरक्षाबलों की हुई मुठभेड़ की एक तस्वीर। ( Photo Source: PTI)

शेर मोहम्मद की बहादुरी पर उनके परिवार को ही नहीं, पूरे गांव वालों को गर्व है। सभी उनके जल्दी ठीक होने की दुआ कर रहे हैं। मां फरीदन का कहना है उन्हें अपने बेटे पर नाज है। धरती मां को बचाने के लिए उनका बेटा नक्सलियों से भिड़ गया और उन्हें धूल चटा दी। छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में घायल जवानों में बुलंदशहर के शेर मोहम्मद भी शामिल हैं। उन्होंने नक्सलियों से लोहा लेते हुए पांच को मार गिराया था। साथ ही अपने साथियों की भी जान बचाई। गांव वाले शेर मोहम्मद की सलामती की दुआ कर रहे हैं। उनका रायपुर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहां उनकी हालत खतरे से बाहर है। उनके भाई मुबारक अली बताते हैं उनकी मंगलवार सुबह फोन पर शेर मोहम्मद से बात हुई है। उन्होंने खुद के खतरे से बाहर होने की जानकारी दी है। सोमवार को सुकमा में सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के बेस कैम्प पर नक्सलियों ने धावा बोल दिया था। कैम्प के पास चिंतलनार और दोरनापल स्टेट हाईवे बन रहा है। इसकी सुरक्षा के लिए सुबह बटालियन की दो कंपनियां रवाना हुई थीं। दोपहर बारह बजे के बाद जब बाकी  जवान खाना खाने के लिए बैठे तो घात लगाए नक्सलियों ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में 26 जवान शहीद हुए थे और आठ घायल हो गए थे। इनमें चार की हालत गंभीर बनी हुई है। घायल होने वालों में बुलंदशहर के शेर मोहम्मद भी शामिल हैं।

यहां आसिफाबाद चंदपुरा गांव के शेर मोहम्मद साल 2010 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। तीन भाइयों में वह सबसे छोटे हैं। दो बड़े भाई मुबारक अली और वारिस अली दिल्ली में रह रहे हैं। मुबारक प्रगति मैदान स्थित भारत व्यापार संवर्धन संगठन (इंडियन ट्रेड प्रमोशन आर्गेनाईजेशन) में बतौर एएसआई तैनात हैं। छोटे वारिस अली की जामिया इलाक़े में कार मरम्मत की दुकान है। चार बहनें भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। शेर मोहम्मद के पिता नूर मोहम्मद भी पूर्व सैनिक रह चुके हैं। वह राजपूताना बटालियन में अपनी सेवा दे चुके हैं।
शेर मोहम्मद के भाई मुबारक ने बताया कि टीवी पर समाचार के जरिए उन्हें सुकमा में हुए नक्सली हमले की जानकारी मिली थी। जिसके बाद शेर मोहम्मद की सलामती को लेकर सभी परिजन चिंतित हो गए। इसके बाद गांव वालों ने उन्हें शेर के शहीद हो जाने की खबर दी। खबर सुन कर परिवार में कोहराम मच गया। अपने लाल की शहादत की खबर सुन कर गांव में मातम पसर गया। मुबारक अली ने बताया भाई की मौत की खबर सुन क र एक बार तो उन्हें यकीन नहीं हुआ। इसके बाद मुबारक ने शहीद हुए जवानों की जानकारी जुटाई। जिसमें शेर मोहम्मद के घायल होने की खबर पता चली।

मुबारक ने बताया जिस टुकड़ी में शेर मोहम्मद शामिल थे। उसमें करीबन डेढ़ सौ जवान शामिल थे। हमला उस वक्त हुआ जब जवान खाना खाने के लिए बैठे ही थे। इस दौरान शेर मोहम्मद ने बहादुरी से नक्सलियों का डट कर मुकाबला किया। उन्होंने पांच नक्सलियों को मार गिराने के साथ अपने कई साथियों की जान भी बचाई।
शेर मोहम्मद के बड़े भाई मुबारक अली की केंद्र सरकार से मांग है कि उनके भाई के साथ घायल हुए जवानों को तरक्की दी जाए। जिससे नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए इन जवानों का हौसला और भी बुलंद हो सके।

 

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