ताज़ा खबर
 

यूपी: देवरिया कांड की पीड़ि‍ता ने सुनाई दिल दहलाने वाली आपबीती- लड़कियों को बांध कर ले जाते थे

पुलिस अधीक्षक रोहन पी. कनय ने बताया कि नारी संरक्षण गृह के बारे में लंबे समय से शिकायत मिल रही थी। मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह की सूची में 42 लड़कियों के नाम दर्ज हैं, लेकिन छापे में मौके पर केवल 24 मिलीं।

Author August 7, 2018 12:22 PM
बच्ची के मुताबिक, वहां शाम चार बजे के बाद रोजाना कई लोग काले और सफेद रंग की कारों से आते थे और मैडम के साथ लड़कियों को लेकर जाते थे, वे देर रात रोते हुए लौटती थीं। संरक्षण गृह में भी गलत काम होता है। (PTI PHOTO)

बिहार के मुजफ्फरपुर की तरह ही उत्तर प्रदेश के देवरिया स्थित नारी संरक्षण गृह में भी देह व्यापार के आरोप लगने बाद इससे जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां नारी संरक्षण गृह की एक पीड़िता ने दिल दहलाने वाले खुलासे करते हुए बताया कि कैसे रात के समय अलग-अलग रंग की गाड़ियां आती थी और जबरन लड़कियों को अपने साथ ले जाती थी। मीडिया के समक्ष एक पीड़िता ने बताया, ‘दीदी बाहर जाती थी और बड़ी मैडम उनको ले जाती थी। अगर कोई नहीं जाने को कहता तो उसे बांध कर ले जाया जाता। सफेद कार आती थी। एक बार हल्की कार आई थी। एक बार लाल कार आई। इसके बाद सुबह के वक्त जब दीदी वापस लौटती तो वह सिर्फ रोती थीं, कुछ नहीं कहती, सिर्फ रोती थी। उनकी आंख फूल जाती थी। पूछने कभी कुछ नहीं बताया। हम वहां काम करते थे।’ पीड़िता ने आगे बताया कि वो नारी संरक्षण गृह में झाझू-पोछा, बर्तन धोती थी। वहां एक कभी एक महीना के लिए जाना होता तो कभी 20 दिन केलिए।

बता दें कि रविवार शाम संरक्षण गृह से भागी लड़की ने पुलिस को जब यह जानकारी दी तो हड़कंप मच गया। पुलिस ने रात में ही संरक्षण गृह पर छापा मारा तो 42 में से 18 लड़कियां गायब मिलीं। देवरिया के डीपीओ ने कहा कि मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाजिक सेवा संस्थान द्वारा संचालित नारी संरक्षण गृह में पहले भी अनिमियता पाई गई थी, उसके आधार पर इनकी मान्यता स्थगित कर दी गई थी। इसके बावजूद संचालिका हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर इसे चला रही है। संचालिका और उसके पति दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में मानव तस्करी, देह व्यापार व बाल श्रम से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस अधीक्षक रोहन पी. कनय ने बताया कि नारी संरक्षण गृह के बारे में लंबे समय से शिकायत मिल रही थी। मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह की सूची में 42 लड़कियों के नाम दर्ज हैं, लेकिन छापे में मौके पर केवल 24 मिलीं। बाकी 18 लड़कियों का पता लगाया जा रहा है। एसपी ने बताया कि अनियमितताओं के कारण इसकी मान्यता जून-2017 में समाप्त कर दी गई थी। लेकिन संचालिका हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर इसे चला रही है।

उन्होंने बताया कि बिहार के बेतिया जिले की 10 साल की बच्ची देर शाम किसी तरह संरक्षण गृह से निकलकर महिला थाने पहुंची। वहां उसने संरक्षण गृह की अनियमितताओं के बारे में जानकारी दी। बच्ची के मुताबिक, वहां शाम चार बजे के बाद रोजाना कई लोग काले और सफेद रंग की कारों से आते थे और मैडम के साथ लड़कियों को लेकर जाते थे, वे देर रात रोते हुए लौटती थीं। संरक्षण गृह में भी गलत काम होता है।

एसपी ने बताया कि संचालिका गिरिजा त्रिपाठी और उनके पति मोहन इनके बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। ऐसे में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में मानव तस्करी, देह व्यापार व बाल श्रम से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App