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गोरखपुर अस्पताल में बच्चों की मौत का आंकड़ा हुआ 63, ऑक्सीजन सप्लायर कंपनी का था 68.58 लाख का बकाया

पिछले साल अप्रैल में भी कंपनी ने ऑक्सीजन सप्लाई रोकी थी लेकिन तब ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ था और समय रहते मामले को सुलझा लिया गया था।

गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में मृत बच्चे का शव लिए परिजन। (Photo Source: Express photo by K Sangam)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के गढ़ गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से हुई मौत का आंकड़ा बढ़कर 63 हो गया है। आज (12 अगस्त को) भी 11 साल के एक बच्चे ने दम तोड़ दिया। वह भी इन्सेफ्लाइटिस से पीड़ित था। इस बीच ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने के बारे में अधिकारियों के बीच पत्राचार की एक कॉपी सामने आई है। एचटी मीडिया के मुताबिक ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स का अस्पताल पर कुल बकाया 68,58, 596 रुपये था। पैसे का भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी।

बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज अस्पताल में  बच्चों की मौत की सरकार ने मेजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इस बीच, अस्पताल को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, वहां किसी तरह की अनोहनी की आशंका को देखते हुए भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया गया है।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने मामले पर विपक्षी दलों से राजनीति नहीं करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि मामले में पूरी तरह से निष्पक्ष जांच की जाएगी और त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इसे एक गंभीर मसला बताया है। इस बीच बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कई मरीजों के परिजनों ने इलाज में कोताही बरतने, भेदभाव करने और बाहर से दवाई और भोजन खरीदने के लिए मजबूर करने के आरोप लगाए हैं।

एचटी मीडिया से बात करते हुए सप्लायर कंपनी पुष्पा सेल्स के दीपांकर शर्मा ने बताया कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से पहले ही बकाये का राशि का भुगतान करने और 10 लाख से ज्यादा की राशि बकाया होने पर ऑक्सीजन सप्लाई रोकने की बात बता दी थी। उन्होंने बताया कि इस बात का उल्लेख एग्रीमेंट में भी है। जब ऑक्सीजन की कमी से बच्चे मरने लगे तब परेशान डॉक्टरों ने उन्हें कई बार फोन किए और ऑक्सीजन सप्लाई बहाल करने को कहा। इसके एवज में असपताल उन्हें 22 लाख रुपये का भुगतान करने की प्रकिया शुरू की। हालांकि, शर्मा ने तब लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई करने की कोशिश की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पिछले साल अप्रैल में भी कंपनी ने ऑक्सीजन सप्लाई रोकी थी लेकिन तब ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ था और समय रहते मामले को सुलझा लिया गया था।

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