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देवबंद का फतवा: बिना बुर्के किसी भी फंक्‍शन में जाना शरीयत के खिलाफ

मौलाना ने कहा कि असल में मुस्लिम महिलाओं के लिए पर्दे में रहना फर्ज है। इस्लाम धर्म में महिलाओं का बिना पर्दे कहीं भी जाना जायज नहीं है।

darul uloom deoband news, darul uloom deoband latest news, UP Assembly Polls 2017, darul uloom deoband Hindi Newsदारूल उलूम देवबंद।

दारुल उलूम देवबंद ने फिर फतवा जारी किया है। नए फतवे में महिलाओं को हिदायत दी गई है कि वो बिना बुर्के के शादी और अन्य समारोह में शामिल ना हो। ऐसा नहीं करने पर इसे गुनाह और गैरइस्लामी करार दिया है। मौलाना अथर उस्मानी ने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं के सिर्फ शादी में ही नहीं बल्कि किसी भी समारोह में बिना बुर्के के जाना शरीयत के खिलाफ है। मौलाना ने कहा कि असल में मुस्लिम महिलाओं के लिए पर्दे में रहना फर्ज है। इस्लाम धर्म में महिलाओं का बिना पर्दे कहीं भी जाना जायज नहीं है। उन्हें बाजार भी बुर्का पहनकर जाना चाहिए।

देवबंद ने पिछले दिनों मुस्लिम शादियों में होने वाली गैर ‘इस्लामिक प्रथाओं’ के खिलाफ भी फतवा जारी किया था। इसमें लड़की के परिवार की तरफ से लड़के के परिवार को भेजे जाने वाले लाल खात (निमंत्रण पत्र) पर फतवा जारी किया गया। लड़की के मामा द्वारा उसे डोली तक ले जाने की प्रथा भी गैर इस्लामिक घोषित की गई। फतवे में कहा गया कि इस प्रथा का पालन इसलिए भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इस कार्य के दौरान दोनों में से किसी एक में वासना का जन्म हो सकता है। दरअसल देवबंद ने मुजफ्फरनगर के एक शख्स को जवाब, शख्स ने ‘लाल खत’ से जुड़ा सवाल पूछा था, देते हुए कहा, लाख खत विदेशी परंपरा है, जो गैर इस्लामिक पंथ से आती है।

देवबंद में मुस्लिम धर्म की बड़ी बैंच ने यह भी कहा कि लाल खत की जगह एक साधारण कार्ड या पोस्ट कार्ड या मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ‘लाल खत’ वाली प्रथा को पूरी तरह से तुरंत त्यागना चाहिए। भांजी को डोली तक ले जाने वाली प्रथा पर भी सख्त नाराजगी जताई गई। बैंच ने कहा कि एक महिला और उसके मामा के बीच रिश्ते बहुत धार्मिक होते हैं। एक आदमी पूरी जवान हो चुकी भांजी को नहीं उठा सकता है। मुस्लिम कानून में यह निश्चित रूप से स्वीकारने लायक नहीं है। इस दौरान दोनों में से अगर किसी में वासना जन्म ले लेती है तो ऐसे संबंधों में हमेशा विनाश का खतरा होता है। इससे अच्छा है दुल्हन खुद चलकर डोली तक जाए या अपनी मां के संरक्षण में चले।

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