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बकरीद पर योगी सरकार का आदेश- खुले में न काटें जानवर, नालियों में खून नहीं बहना चाहिए

सीएम ने अधिकारियों से राज्य में त्योहार को देखते हुए कानून-व्यवस्था बहाल रखने और बिजली-पानी की सप्लाई भी सुनिश्चित कराने को कहा है। निर्देश यह भी दिया गया है कि संरक्षित जानवरों की कुर्बानी न हो, इसके लिए विशेष चौकसी बरती जाय।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि बकरीद के मौके पर खुले में जानवर ना काटे जाएं और नालियों में खून न बहाया जाय।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि बकरीद के मौके पर खुले में जानवर ना काटे जाएं और नालियों में उनका खून न बहाया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रशासन इसकी व्यवस्था करे ताकि दूसरे समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत न हो। मुख्यमंत्री ने शनिवार (18 अगस्त) की रात राज्यभर के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए बैछक की और उन्हें सख्त निर्देश दिया कि बकरीद पर हर हाल में राज्य में शांति व सद्भाव बहाली सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाय कि खुले में जानवरों की कुर्बानी न तो दी जाय और न ही खून या अन्य चीजें खुले में निस्तारित किए जाएं।

सीएम ने अधिकारियों से राज्य में त्योहार को देखते हुए कानून-व्यवस्था बहाल रखने और बिजली-पानी की सप्लाई भी सुनिश्चित कराने को कहा है। निर्देश यह भी दिया गया है कि संरक्षित जानवरों की कुर्बानी न हो, इसके लिए विशेष चौकसी बरती जाय। राज्य के पश्चिमी हिस्से के अधिकारियों को विशेष रूप से अलर्ट रहने को कहा गया है। मुजफ्फरनगर के डीएम राजीव शर्मा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है कि मुख्यमंत्री के आदेश का हर हाल में पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया है कि सोमवार को जिले के सभी अधिकारियों के साथ इस बावत बैठक की गई है। इसके बाद अधिकारियों और समाज के अलग-अलग समुदाय के प्रबुद्ध लोगों के साथ भी बैठक की जाएगी।

सीएम ने उन जिलों के अधिकारियों को निगरानी तेज करने को कहा है जहां-जहां से बकरीद के दौरान कांवड़ यात्रा गुजरनी है। हाल के दिनों में गोकशी की वजह से मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ी हैं। बता दें कि बकरीद बुधवार (22 अगस्त) को मनाई जाएगी।  बकरीद को ईद-उल-अजहा या ईद-उल-जुहा भी कहा जाता है। यह इस्लाम के पवित्र त्योहारों में एक है। ईद-उल-जुहा कुर्बानी का दिन भी कहलाता है। इस दिन बकरे या किसी अन्य पशु की कुर्बानी दी जाती है। इसे इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से आखिरी महीने के दसवें दिन मनाया जाता है। मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन को हजरत इब्राहिम के अल्लाह के प्रति अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी की याद में मनाते हैं।

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