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यूपी: सीएम योगी आदित्‍यनाथ को मिला ‘दलित मित्र’ अवार्ड, विरोध करने वाले गिरफ्तार

राज्‍यपाल के हाथों 'सम्मान' ग्रहण करने के बाद योगी ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 40 लाख से अधिक शौचालय निर्मित कर दलितों के उन्नयन के लिए कड़ी मेहनत से कार्य किया है।"
आंबेडकर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्‍यनाथ को ‘दलित मित्र’ सम्‍मान से नवाजा गया। (Photo: PTI)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण किया। बाद में योगी आंबेडकर महासभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्हें ”दलित मित्र” की उपमा से सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक भी मौजूद रहे। योगी को यह सम्‍मान दिए जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कई दलित एक्टिविस्‍ट्स को महासभा कार्यालय के नजदीक गिरफ्तार कर लिया गया। न्‍यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, दलित एक्टिविस्‍ट एसआर दारापुरी, रिटायर्ड आईएएस हरीश चंद्रा, गजोधर प्रसाद और एनएस चौरसिया को महासभा कार्यालय के गेट से गिरफ्तार किया गया।

कार्यक्रम के दौरान, आंबेडकर महासभा के अध्‍यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा, ”योगी दलितों के लिए उनसे कहीं ज्‍यादा काम कर रहे हैं जो मूर्तियां बनवाने पर फोकस रखते हैं। योगी एक दिन सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठेंगे।” राज्‍यपाल के हाथों ‘सम्मान’ ग्रहण करने के बाद योगी ने कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 40 लाख से अधिक शौचालय निर्मित कर दलितों के उन्नयन के लिए कड़ी मेहनत से कार्य किया है।”

योगी ने कहा, ”बाबा साहेब ने भारत के संविधान में कई प्रावधान बनाये ताकि सामाजिक विषमता को दूर किया जा सके और समाज के दबे कुचले वर्ग को सामाजिक न्याय मुहैया कराया जा सके।” उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने दलितों और समाज के दबे कुचले वर्ग के अधिकार के लिए आजीवन संघर्ष किया।

कार्यक्रम में योगी के साथ उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा भी थे। भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने भी मूर्ति पर माल्‍यार्पण किया। राज्य सरकार की ओर से जयंती के मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित किये गये। पूरे प्रदेश में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किये गये ताकि किसी संभावित हिंसक घटना को रोका जा सके।

दिनेश शर्मा ने कहा, “हम जब अंबेडकरजी की जयंती मना रहे हैं, तब यह कहना जरूरी है कि अंबेडकरजी का नाम लेने वाले ही अंबेडकरजी को सम्मान नहीं दे पाए हैं। हमने अंबेडकरजी को सम्मान देने का काम किया है। दलित उद्योगपतियों को लिए अलग से काम किया गया है।”

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