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मायावती के इस दांव पर बिफरी बीजेपी, बोली- बुआ-बबुआ ने 14 साल में किया यूपी बदहाल

भाजपा के आरोप को सिरे से नकारते हुए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि कांशीराम स्मारक में आम लोगों का प्रवेश वर्जित था। वहां सुरक्षा जांच के बाद आम लोगों को प्रवेश दिया जाता था।

2 जून 2018 को यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अपना बंगला खाली कर दिया (फोटो-पीटीआई)

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भले ही 13 ए, मॉल एवेन्यू स्थित सरकारी बंगले को खाली कर दिया हो लेकिन इसे दलित नेता कांशीराम का संग्रहालय बनाने के मुद्दे पर विवाद अभी थमा नहीं है और भाजपा ने इस पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अगर यह स्मारक था तो अभी तक इसमें आम लोगों को आने जाने की अनुमति क्यों नहीं थी? हालांकि बसपा ने कहा है कि वहां आम लोगों का आना जाना था और सुरक्षा जांच के बाद लोग वहां जा सकते थे। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ल ने कहा, “मायावती ने जिस तरह दो जून को प्रेस कांफ्रेंस के बाद पत्रकारों को घूम घूमकर अपना बंगला दिखाया, क्या उससे पहले आम लोगों का प्रवेश उस बंगले में था।” उन्होंने कहा, “अगर 13 ए, मॉल एवेन्यू मान्यवर श्री कांशीराम जी यादगार विश्राम स्थल था और वहां संग्रहालय था तो वहां आम लोगों का प्रवेश क्यों नहीं होता था? संग्रहालयों में या तो नि:शुल्क या फिर टिकट लगाकर आम लोगों को प्रवेश दिया जाता है।”

उधर भाजपा के आरोप को सिरे से नकारते हुए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि कांशीराम स्मारक में आम लोगों का प्रवेश वर्जित था। वहां सुरक्षा जांच के बाद आम लोगों को प्रवेश दिया जाता था। उन्होंने बताया, “वह बंगला आम लोगों के लिए खुला था जिस हिस्से में मायावती रहती थीं, केवल वहां आम लोगों का प्रवेश नहीं था लेकिन परिसर के बाकी हिस्से में लोग आते जाते थे।” एक सवाल के जवाब में मिश्र ने कहा कि बंगले का कब्जा सरकार को सौंप दिया गया है।

मनीष शुक्ल ने मायावती के इस आरोप का खंडन किया कि कैराना लोकसभा सीट और नूरपुर विधानसभा सीट पर भाजपा को मिली पराजय से जनता का ध्यान बंटाने के लिए ये खबरें सरकार ने चलवायीं कि मायावती 13 ए, मॉल एवेन्यू बंगला खाली नहीं कर रही हैं। शुक्ल ने कहा कि कायदे से उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुरूप मायावती को बंगला तुरंत खाली कर देना चाहिए था लेकिन वह सरकारी बंगले का मोह त्याग नहीं पा रही थीं। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव के इस बयान पर चुटकी ली कि 14 माह में भाजपा ने सब बर्बाद कर दिया। शुक्ल ने सवाल किया, “बंगला छूटने पर इतना दर्द? नव समाजवादी जनता की गाढ़ी कमाई के दुरूपयोग के आदी हो गए हैं और जब सरकारी सुख-सुविधाएं छूट रही हैं तो प्रदेश और जनता की याद आ रही है।” उन्होंने कहा कि वस्तुत: उत्तर प्रदेश की बदहाली के जिम्मेदार “अखिलेश और उनकी बुआ जी (मायावती) का चौदह वर्ष का कार्यकाल है।”

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