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बुलंदशहर हिंसा: गांववालों ने विधायक को ढाई घंटे तक बनाए रखा बंधक, देखें वीडियो

पंचायत में सुमित के पिता अमरजीत सिंह ने कहा कि पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने आत्मरक्षा में नहीं बल्कि सुमित की गोली मारकर हत्या कर दी।

Author December 30, 2018 11:09 AM
स्याना विधायक देवेंद्र सिंह को ग्रामीणों ने करीब ढाई घंटे तक बंधक बना लिया। जानकारी के मुताबिक ग्रामीण सुमित के भाई को नौकरी, परिजनों को आर्थिक सहायता और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग रहे थे। (photo source video screenshot)

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पिछले दिनों भीड़ की हिंसा में मारे गए सुमित के घर शनिवार (29 दिसंबर, 2018) को ग्रामीणों ने पंचायत बुलाई। इसमें स्याना विधायक देवेंद्र सिंह को ग्रामीणों ने करीब ढाई घंटे तक बंधक बना लिया। जानकारी के मुताबिक ग्रामीण सुमित के भाई को नौकरी, परिजनों को आर्थिक सहायता और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग रहे थे। पंचायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस निर्दोष लोगों को पकड़ जबरन जेल में भेज रही है। इस दौरान ग्रामीणों के बीच बैठे विधायक ने कहा कि वो उनकी समस्या को राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के समक्ष रखेंगे। सिंह के इस आश्वासन के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

एनबीटी अखबार में छपी खबर के मुताबिक पंचायत में सुमित के पिता अमरजीत सिंह ने कहा कि पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने आत्मरक्षा में नहीं बल्कि सुमित की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस फर्जी गवाह पेश किए और उनके बेटे को पत्थरबाज बता दिया। अमरजीत ने दावा किया पुलिस जिस गवाह को पास में चाय बेचने वाला बता रही है वह पास के गांव का किसान है। उन्होंने फर्जी गवाह बनाए जाने की शिकायत सीएम योगी से भी की है।

इसके अलावा पंचायत में मौजूद अन्य ग्रामीणों ने कहा कि हिंसा के चश्मदीद कोतवाल ड्राइवर हमराह और मौक मौजूद होमगार्ड से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही। पंचायत में ही मौजूद प्रंशात नट की चाची और मौसी ने बताया कि उसे 25 दिसंबर को ग्रेटर नोएडा में रह रहे रिश्तेदारों ने पुलिस के हवाले किया था। दोनों ने आरोप लगाया कि पुलिस झूठे गवाहों से प्रशांत पर कोतवाल की हत्या करने का आरोप लगवा रही है।

गौरतलब है कि स्याना विधायक देवेंद्र सिंह लोधी का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें उन्होंने बताया कि बुलंदशहर हिंसा मामले में निर्दोष लोगों को किसी भी कीमत पर जेल में नहीं जाने दिया जाएगा। विधायक ने कहा कि गांव में स्थानीय लोगों ने उन्हें करीब तीन घंटे तक बिठाए रखा। उन्होंने कहा, ‘मैं दो बजे उनके पास पहुंचा और शाम पांच बजे छोड़ा गया।’

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