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पालतू बछड़े की हत्या करने वाले दलित ने सामाजिक बहिष्कार के डर से ट्रेन के आगे कूदकर दी जान

पेशे से मजदूर रामू कुंवारा था और वह अपनी मां चेरिया देवी और 3 भाइयों के साथ रहता था।

इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दुर्घटनावश अपने ही पालतू बछड़े की हत्या करने वाले दलित की खुदकुशी का मामला सामने आया है। पुलिस ने शनिवार सुबह उत्तर प्रदेश के गोंडा के इतियाटोक इलाके स्थित रेलवे ट्रैक से रामू (18) का शव बरामद किया था, जिसका कथित तौर पर गांववालों ने सामाजिक तौर पर बहिष्कार कर दिया था। वह गोपालपुर बारांडी गांव का रहने वाला था। पुलिस ने बताया कि रामू ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी है। घटनास्थल से कोई स्यूसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। इलाके के पुलिस स्टेशन अॉफिसर वेद प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा, उसे पता चल गया था कि अपने पालतू बछड़े की हत्या करने के बाद गांववालों ने उसका सामाजिक तौर पर बहिष्कार करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि अब तक रामू के परिवार से कोई भी शिकायत दर्ज कराने आगे नहीं आया है। पेशे से मजदूर रामू कुंवारा था और वह अपनी मां चेरिया देवी और 3 भाइयों के साथ रहता था।

गांव की प्रधान ऊषा देवी के पति बलराम तिवारी ने बताया कि 3 दिन पहले रामू अपने पालतू बछड़े को घास चराने खेतों में ले जा रहा था, वहां उसने हथौड़े से अपने बछड़े पर वार किया। इसके बाद वह उसे वहीं बांधकर घर लौट आया। 2 घंटे बाद रामू को गांववालों ने बताया कि उसके वार से बछड़े की मौत हो गई है। तिवारी ने कहा कि इसके बाद गांव में सिलसिलेवार बैठकें हुईं, जिसमें तय किया गया कि जब तक पंचायत अपना फैसला नहीं देती तब तक रामू का सामाजिक तौर पर बहिष्कार किया जाएगा। तिवारी ने कहा कि आमतौर पर जिस पर गाय या बछड़े की हत्या का आरोप होता है उसे गांव के बाहर एक साल तक अकेला रहना पड़ता है और खुद ही अपना खाना पकाना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि शनिवार को सुबह 8 बजे चेरिया देवी मेरे घर आई थीं। उन्होंने बताया कि 11 बजे इस मामले को लेकर पंचायत बैठेगी। उन्होंने मुझसे इसमें शामिल होने को कहा था। एक घंटे बाद वह चली गई और इसके बाद गांववालों से पता चला कि रामू ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी है।

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