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ईवीएम से नहीं, रणनीति से भाजपा ने 50 सीटों पर छीने बसपा के वोट

बसपा ने जिस सीट पर जिस जाति के उम्मीदवार को टिकट दिया भाजपा ने भी उसी जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतार कर अपनी जीत तय की।

Author March 16, 2017 9:32 PM
बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Source: PTI/File)

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में भाजपा को बड़ी और अप्रत्याशित जीत मिली है। खुद भाजपा को भी यकीन नहीं था कि उसके गठबंधन को 325 सीटें मिलेंगी। इस जीत को जहां बसपा सुप्रीमो मायावती ईवीएम में छेड़छाड़ से हासिल की गई जीत कह रही हैं। वहीं चुनावों का विश्लेषण करने से साफ होता है कि भाजपा ने खास रणनीति के जरिए बसपा को हराया है। राज्य की करीब 50 ऐसी विधान सभा सीटें हैं जहां भाजपा ने बसपा की रणनीति पर चलते हुए उसी के समीकरण से उसके प्रत्याशियों को हराया है। यानी बसपा ने जिस सीट पर जिस जाति के उम्मीदवार को टिकट दिया भाजपा ने भी उसी जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतार कर अपनी जीत तय की। कई जगहों पर हार-जीत का अंतर तो काफी कम रहा है। बसपा को पटखनी देने के गेमप्लान के तहत ही भाजपा ने अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान आखिरी दौर में किया जबकि बसपा ने सबसे पहले जनवरी के पहले हफ्ते में ही उम्मीदवारों का एलान कर दिया था।

बांदा जिले के टिंडवाड़ी विधानसभा में प्रजापति जाति के करीब 30 हजार मतदाता हैं। बसपा ने यहां से जगदीश प्रजापति को मैदान में उतारा था जबकि भाजपा ने उसी जाति के उम्मीदवार ब्रजेश प्रजापति को चुनावी मैदान में उतारा। ब्रजेश प्रजापति ने कुल 82,197 वोट हासिल किए जबकि उनके प्रतिद्वंदी जगदीश प्रजापति ने 44, 790 वोट हासिल किए। यह बसपा के परंपरागत वोटर्स जाटवों की संख्या से काफी कम है।

इसी तरह चित्रकूट विधान सभा सीट से बसपा ने ब्राह्मण उम्मीदवार जगदीश प्रसाद गौतम को उतारा  तो भाजपा ने भी वहां से ब्राह्मण उम्मीदवार चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को उतार दिया। उपाध्याय ने 90,366 वोट जबकि गौतम ने 47,780 वोट हासिल किए। गौतम चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे। पड़ोस में माणिकपुर विधान सभा सीट पर बसपा ने मौजूदा विधायक चंद्रभान सिंह पटेल को उतारा तो भाजपा ने भी कुर्मी उम्मीदवार आर के सिंह पटेल को उतार दिया। आर के सिंह पटेल पहले बसपा के नेता रह चुके हैं। सिंह ने यहां 84,988 वोट हासिल किए जबकि चंद्रभान सिंह तीसरे नंबर पर रहे। उन्हें 32,498 मत मिले।

ललितपुर में भी बसपा ने संतोष कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया तो भाजपा ने रामरतन कुशवाहा को मैदान में उतारा जिन्हें 1,56,942 वोट मिले, जबकि संतोष कुशावाहा को 55, 549 वोट ही मिल सके। ये सभी बसपा के वोट थे जो भाजपा के खाते में चले गए। बुंदेलखंड इलाके के भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि मोदी जी की छवि और भाजपा के कामकाज की शैली की वजह से फ्लोटिंग वोटर्स का रुझान इस बार हमारी पार्टी की तरफ हुआ। हमने इसके लिए जातीय रणनीति अपनाई थी। उन्होंने कहा कि बसपा को इस बार इसी वजह से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने बताया कि उच्च जाति और ओबीसी के लोगों ने इस बार भाजपा पर भरोसा किया। हालांकि, इसी नक्शे कदम और रणनीति पर चलते हुए मायावती ने भी वोटरों को अपने पाले में करने की कोशिश की थी लेकिन वो नाकाम रहीं। मायावती ने इस बार चुनाव में कुल 62 ब्राह्मण, 36 क्षत्रीय, 106 ओबीसी, 84 दलित और 100 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था।

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