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आजमगढ़ उपचुनाव: उस बेचारे को झूठमूठ दौड़ाया, टिकट भी नहीं दिया, अखिलेश यादव ने सुनील आनंद को जलील किया, बोले गुड्डू जमाली

यूपीः बसपा में शामिल होने की बात पर गुड्डू नेकहा कि इसी पार्टी में मेरा जन्म हुआ, इसलिए मैं फिर से बसपा में आ गया। संकटकाल में एआईएमआईएम ने साथ दिया, जिसका मैं आभारी हूं।

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आजमगढ़ से बसपा उम्मीदवार गुड्डू जमाली। (फोटो वीडियो ग्रैब यूट्यूब वीडियो)

आजमगढ़ उपचुनाव में बसपा की तरफ से ताल ठोक रहे गुड्डू जमाली का कहना है कि सपा हमेशा से धोखा देने का काम करती है। सुनील आनंद को बेचारा बनाकर झूठमूठ दौड़ाया गया। फिर उसको टिकट भी नहीं दिया। उनका कहना था कि टिकट नहीं देना था तो उनके नाम की चर्चा ही क्यों की गई। अखिलेश यादव ने सुनील आनंद को जलील किया है।

शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने सपा पर निशाना साधा कहा कि अखिलेश यहां से अपनी पत्नी डिंपल को चुनाव लड़ाना चाहते थे। लेकिन जब दिखा कि सीट हार सकते हैं तो धर्मेंद्र को मैदान में उतार दिया। उनका कहना था कि मुलायम परिवार आजमगढ़ में बाहरी है। बीजेपी उम्मीदवार भी यहां का नहीं है। वे अकेले ऐसे उम्मीदवार हैं जो आजमगढ़ के रहने वाले हैं। उनको हिंदू मुस्लिम सभी का एक सा समर्थन मिल रहा है।

वो बोले कि ये लोग कैसे कह सकते हैं कि ये मुलायम-अखिलेश का गढ़ है। ये कोई उनकी पारिवारिक संपत्ति नहीं है। लोकतंत्र में जो मजबूत होगा जनता उनसे ही पसंद करेगी। उन्होंने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में यदि सत्ता का दुरूपयोग कर बूथ कैप्चरिंग नहीं की गई होती तो मुलायम सिंह यादव यहां से नहीं जीतते। ये परिवार लोगों की चीजों को धोखे से छलता है।

बसपा में शामिल होने की बात पर गुड्डू नेकहा कि इसी पार्टी में मेरा जन्म हुआ, इसलिए मैं फिर से बसपा में आ गया। संकटकाल में एआईएमआईएम ने साथ दिया, जिसका मैं आभारी हूं। उनका कहना था कि वो आजमगढ़ सीट जीतने जा रहे हैं। 2027 में प्रदेश में फिर से बसपा की सरकार बनने जा रही है। मायावती के प्रति लोगों की आस्था बढ़ी है। लोग बीजेपी की योगी सरकार से बुरी तरह त्रस्त हैं।

गुड्डू जमाली बसपा के टिकट पर मुबारकपुर विधानसभा सीट से 2012 में विधायक बने थे। मायावती ने बीते वर्ष उन्हें बसपा विधायक दल का नेता भी बनाया था, लेकिन उन्होंने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा से इस्तीफा देकर असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम में शामिल होकर अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ गया। ओवैसी के पास जाने के सवाल पर उनका कहना था कि बसपा में उनकी आत्मा बसती है। उनकी गलती थी कि वो पार्टी छोड़कर गए। उन्हें फैसले पर अफसोस है। बहन मायावती की पार्टी ही उनका असली घर है।

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