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पत्नी के आरोपों पर बोले एएमयू प्रोफेसर-एसएमएस और वॉट्सऐप से अभी सिर्फ दो बार तलाक दिया, तीन तलाक नहीं

'तलाक' मुस्लिमों में प्रचलित एक ऐसी प्रथा है जिसमें कोई भी मुस्लिम शख्स अपनी पत्नी को सिर्फ तीन बार 'तलाक' शब्द का इस्तेमाल कर उसे छोड़ सकता है।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर खालिद खान। (फोटो सोर्स एएनआई)

कथित तौर पर पत्नी को तलाक देने के आरोपों पर घिरे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर खालिद खान ने अब सफाई दी है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एनएनआई से कहा, ‘मैंने उन्हें (पत्नी को) तीन तलाक नहीं दिया। बस मौखिक रूप से तलाक की बात कही। इससे जुड़े कुछ पोस्ट वॉट्सऐप के जरिए भी भेजे। करीब एक महीने बाद मैंने फिर एसएमएस और वॉट्सऐप पर तलाक की बात कही। हालांकि वो अभी तक मेरी पत्नी हैं। मैंने उन्हें सिर्फ दो बार तलाक दिया, तीसरी बार कभी तलाक नहीं दिया।’ गौरतलब है कि पिछले दिनों एक महिला ने अपने पति प्रोफेसर खालिद पर तलाक देने का आरोप लगाया था। महिला ने बताया कि खान ने वॉट्सऐप के जरिए उन्हें तलाक दिया है। बाद में पुलिस ने महिला की अपील पर प्रोफेसर के खिलाफ मारपीट और घरेलू हिंसा से संबंधित आरोपों के तहत केस दर्ज किया।

पीटीआई की खबर के अनुसार महिला ने पुलिस को बताया कि प्रोफेसर खालिद बिन यूसुफ खान उसे प्रताड़ित करते हैं, घर में आने पर भी रोक लगा रखी है। एसएसपी राजेश पांडे ने बताया, ‘पीड़ित महिला ने बीते महीने हमसे मदद की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर खान वॉट्सऐप के जरिए दो बार तलाक दे चुके हैं। जिसपर प्रोफेसर के खिलाफ केस दर्ज किया गया।’

जानकारी के लिए बता दें कि इस साल 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए इसे गैर कानूनी करार दिया था। कहा गया कि तीन तलाक की इस्लामिक प्रथा गैर कानूनी है। ये भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। जो कानून से पहले सभी को समानता देता है। ‘तलाक’ मुस्लिमों में प्रचलित एक ऐसी प्रथा है जिसमें कोई भी मुस्लिम शख्स अपनी पत्नी को सिर्फ तीन बार ‘तलाक’ शब्द का इस्तेमाल कर उसे छोड़ सकता है। हालांकि अब ये भारत में गैर कानूनी है।

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