amethi widowed and poor did not getting house - Jansatta
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अमेठी- विधवा, दिव्यांग को नहीं मिल पा रहे प्रधानमंत्री योजना के घर

उत्तर प्रदेश की पुरानी सरकार में भी विधवा विकलांग और बेसहारा लोहिया आवास योजना से बाहर किए गए थे। इससे इनकी उपेक्षा पुरानी सरकार के बराबर है।

Author अमेठी | July 26, 2017 7:09 AM
रिक्शा चलाते गरीब बच्चें।

स्वामीनाथ शुक्ल

प्रधानमंत्री आवास योजना में जिले में 11508 आवास बनेंगे, लेकिन इसमें विधवा, दिव्यांग और बेसहारा के लिए मकान नहीं है। इससे मूक-बधिर, दृष्टिहीन और अन्य दिव्यांगो को अभी सरकारी मकान का इंतजार करना पड़ेगा।  इसके पहले उत्तर प्रदेश की पुरानी सरकार में भी विधवा विकलांग और बेसहारा लोहिया आवास योजना से बाहर किए गए थे। इससे इनकी उपेक्षा पुरानी सरकार के बराबर है। उत्तर प्रदेश में पुरानी सरकार की सभी आवास योजनाएं बंद हो चुकी हैं। अब केवल प्रधानमंत्री आवास योजना बची है, लेकिन इसमें सबके लिए मकान नहीं हैं। इससे अमेठी के बेघरों को छत नसीब नहीं होगी।  उत्तर प्रदेश में सरकार बदल चुकी है, लेकिन आवास की चयन प्रक्रिया पुरानी है। इससे दिव्यांग उपेक्षित पड़े हैं जबकि प्रधानमंत्री दिव्यांगों के लिए सरकारी आवास का एलान कर चुके हैं। लेकिन चयन से जुड़े अफसरों को प्रधानमंत्री के एलान से कोई सरोकार नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना के चयन में खुलेआम लेन देन किया गया है। इससे पात्रों को लाभ नहीं है। सरकारी आवास योजना के चयन में खुलेआम भ्रष्टाचार है जिससे बेघरों को किसी भी सरकार में मकान नहीं है। अमेठी की जंगलरामनगर सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। इस ग्राम पंचायत में 100 से ज्यादा दिव्यांग हैं लेकिन आवास किसी के पास नहीं है जबकि जंगलरामनगर में 1000 से ज्यादा लोहिया आवास बन चुके हैं। इस ग्राम पंचायत के रामनगर में फूलचंद्र मूक-बधिर हैं। इनकी पत्नी और भाई भी मूक-बधिर हैं, लेकिन इनके पास सरकारी आवास नहीं है। जबकि अमेठी के दो जिलाधिकारी जगतराज त्रिपाठी और चंद्रकांत पांडेय रामनगर के फूलचंद्र को सरकारी आवास देने का आदेश कर चुके हैं।

चयन से जुड़े अफसरों ने जिलाधिकारी के खत का पालन नहीं किया है। इससे फूलचंद्र आवास की तलाश में भटक रहे हैं। दिव्यांगों के पास घूस के लिए पैसे नहीं है। इससे आवास की सूची से इनका नाम गायब हो जाता है। इसी ग्राम पंचायत में पूरे मन्नूराम के शिवराम हरीराम, ननकऊ और बड़का सब दृष्टिहीन हैं। जबकि इस परिवार के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और बैंक पासबुक तक हंै। लेकिन अफसरों ने अब तक इन्हें आवास मुहैया नहीं कराया है। शिवराम ने कहा कि वे सभी तहसील दिवस में जाते हैं लेकिन उनकी फरियाद सुनी नहीं जाती है। इनके पास पुश्तैनी मकान था लेकिन गांव वाले कब्जा कर चुके हैं। इनका कहना है कि वे लोहिया आवास की सूची में थे, लेकिन 70 हजार के कारण वे सूची से बाहर हो गए थे। मुख्य विकास अधिकारी अपूर्वा दुबे ने कहा कि दिव्यांग परिवार गंभीर विषय है। इससे जुड़े ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी दोनों बराबर के जिम्मेदार हैं। दिव्यांग परिवार को आवास न मिलने की जांच वह स्वयं करेंगी। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी विद्या देवी ने कहा कि उनके पास दिव्यांगों को पेंशन के अलावा कुछ भी नहीं है।

प्रधानमंत्री आवास योजना
-13 ब्लाकों की 673 ग्राम पंचायतों में 11508 आवास बनेंगें। इसमें सबसे ज्यादा जामों और सबसे कम शाहगढ़ ब्लाक में प्रधानमंत्री आवास बनेंगे।
-585 अमेठी ब्लाक , बहादुरपुर 567, भादर 634, भेटुआ 484, गौरीगंज 1045, जगदीशपुर 1318, जामों 1565, मुसाफिरखाना 1410, संग्रामपुर 429, शाहगढ़ 333, बाजारशुकुल 1399, सिंहपुर 1086 और तिलोई में 653 प्रधानमंत्री आवास बनेंगे।

 

 

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