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अमेठी- बुनियादी शिक्षा की हिली हुई है बुनियाद

अमेठी के बेसिक शिक्षा अधिकारी का दावा है कि सरकारी शिक्षा में पौने दो लाख छात्र जुड़े हैं, जबकि स्कूल आने वाले छात्रों की संख्या 50,000 भी नहीं होगी।

Author अमेठी | April 26, 2017 5:16 AM
स्कूल में बाउंड्री नहीं होने के कारण कुत्ते स्कूल में घुसकर मिड डे मील खा जाते हैं।

स्वामीनाथ शुक्ल

अमेठी जिले में बुनियादी शिक्षा की चूलें हिली हुई हैं। इसके लिए जिम्मेदार अफसर ही नहीं बचे हैं। इससे सर्वशिक्षा अभियान का ’ सब पढ़े, सब बढ़े’ का पुराना नारा भोथरा हो चुका है जबकि इस नारे की बुलंदी के लिए विश्व बैंक अरबों रुपए खर्च हो चुके हैं। इस नारे को छात्र, शिक्षक और अफसर तीनों भूल गए हैं। सब पढ़े और सब बढें के इस जुमले को साक्षरता मिशन से जोड़ा गया था। इसके लिए प्राथमिक शिक्षा के प्राथमिक पाठशाला की दीवाल पर लम्बी पेंसिल और आस-पास बैठे दो बच्चों की तस्वीर शिक्षा से जोड़ने के लिए काफी थी। लेकिन सरकार का नारा और स्कूल के दीवार की तस्वीर दोनों गुम हो चुकी हैं। जबकि सर्वशिक्षा अभियान और साक्षरता मिशन दोनों लागू है।
वैसे, बेसिक शिक्षा में गुरुओं की कोई कमी नहीं है, फिर भी शिष्यों को गुरुओं का इंतजार रहता है। हालांकि गांवों में कुछ विद्यालय शिक्षकों की कमी से बंद पड़े हैं, वहीं शहर में पढ़ाने वालों की कोई कमी नहीं है। शहरी विद्यालयों में छात्रों की संख्या इकाई में बची है। मगर अफसर आंकडेÞबाजी में व्यस्त हैं। बुनियादी शिक्षा के कायदे-कानून तक पर हैं। इन मानकों पर किसी भी स्कूल में शिक्षक की तैनाती नहीं है। लिहाजा शहरी स्कूलों में शिक्षक भरे पड़े हैं।

अमेठी के बेसिक शिक्षा अधिकारी का दावा है कि सरकारी शिक्षा में पौने दो लाख छात्र जुड़े हैं, जबकि स्कूल आने वाले छात्रों की संख्या 50,000 भी नहीं होगी। कारण बिल्कुल साफ है। प्राथमिक शिक्षा में शिक्षा देने के नाम पर कुछ भी नहीं है। बेसिक शिक्षा में फर्जी अंकपत्र और प्रमाणपत्र पर नौकरी लेने का गोरखधंधा पुराना है। कई शिक्षक टीईटी, बीएड, बीटीसी का फर्जी प्रमाणपत्र देकर नौकरी कर रहे हैं। जिम्मेदार अफसर कहते हैं कि तमाम विभागीय जांच-पड़ताल के बाद भी कई फर्जी शिक्षक बच जाते हैं लेकिन सूचना पर जेल जाते हैं।
बेसिक शिक्षा के सूत्रों का कहना है कि अखिलेश राज में कई शिक्षक फर्जी टीईटी प्रमाण पत्र देकर नौकरी कर रहे हैं। वे बाद में असली टीईटी प्रमाणपत्र लगाकर असली बन जाएंगे। फर्जी शिक्षक के कई मामले अदालतों में विचाराधीन हैं। नए शिक्षा सत्र की पूजा एक अप्रैल को हो चुकी हैस्, लेकिन छात्रों के पास किताबें नहीं हैं। इससे वे स्कूल में खाली बैठे हैं। सरकारी स्कूलों की संख्या 1300 के पार है। सर्वशिक्षा अभियान में स्कूलों को गैस चूल्हा और बर्तन के पैसे बहुत पहले मिल चुके हैं, लेकिन सिलेंडर का अता-पता नहीं हैं।

जिले के दर्जन भर आदर्श विद्यालयों को छोड़कर बाकी स्कूलों में बिजली, पंखे और शौचालय नहीं हैं। स्कूलों मेंकहीं छात्रों की संख्या इकाई में है तो कहीं दहाई में है। उधर निजी स्कूल भरे पड़े हैं। हालांकि इनके पास अनुमति तक नहीं है। निजी स्कूल में प्रवेश के नाम पर 8000 से लेकर 35,000 रुपए तक लगते हैं। इसके बाद 1200 से लेकर 1800 रुपए तक की फीस है। परसावां के निजी स्कूल संचालक ने बताया कि पाठ्यक्रम की किताबें बाहर नहीं मिलती हैं। इससे स्कूल के अंदर किताबें बिकती हैं। इस पर अमेठी के जिलाधिकारी योगेश कुमार ने कहा कि उनकी टीम धड़-पकड़ में जुटी है।

 

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