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Ambedkar Jayanti 2018: अंबेडकर जयंती पर सियासी होड़: बीजेपी का 1.40 लाख बूथों पर तो सपा का सभी जिलों-नगरों में कार्यक्रम

आंबेडकर की वैचारिक विरासत के आधार पर सियासी ताकत बनी बसपा हमेशा से बाबा साहब की जयन्ती को बड़े पैमाने पर मनाती आयी है।

14 अप्रैल, 2018 को बाबा साहेब की 127वीं जयंती है।

14 अप्रैल, 2018 को बाबा साहेब की 127वीं जयंती है। इस मौके पर हर साल राजनीतिक दल उन्हें अलग-अलग तरीके से श्रद्धांजलि देने की कोशिशों में जुटा है। लेकिन इस बार सभी पार्टियों में बाबा साहब के प्रति सम्मान जताने की जैसे होड़ सी मची है। आंबेडकर की 127वीं जयन्ती के मौके पर भाजपा जहां हर जिले में विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगी, वहीं सपा भी हर जिले में आयोजन करके बाबा साहब के प्रति अपनी श्रद्धा जताकर बसपा के साथ अपनी दोस्ती की नयी पारी को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। भाजपा ने आंबेडकर जयन्ती को अभूतपूर्व तरीके से मनाने की तैयारी की है।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने ‘भाषा‘ को बताया कि उनकी पार्टी आंबेडकर जयन्ती के मौके पर प्रदेश के सभी एक लाख 40 हजार बूथों पर कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसके अलावा सभी जिला मुख्यालयों पर भी बड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की ‘ड्यूटी‘ लगायी गयी है कि वे अपने लिये आबंटित जिले में जाकर आंबेडकर जयन्ती कार्यक्रमों में ना सिर्फ शिरकत करें, बल्कि लोगों को यह एहसास भी करायें कि आंबेडकर को वाजिब सम्मान सिर्फ भाजपा ने ही दिलाया है।

उधर, आगामी लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करने की मंशा लिये सपा भी आंबेडकर जयन्ती पर विशेष आयोजन करने जा रही है। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि पार्टी की सभी जिला एवं नगर इकाइयों को निर्देश दिये गये हैं कि वे जयन्ती पर भव्य कार्यक्रम आयोजित करके बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित करें और देश के प्रति उनके योगदान और दलित उत्थान में उनकी भूमिका की चर्चा करें। सपा अभी तक आंबेडकर जयन्ती को रस्मी तौर पर मनाती आयी है। सम्भवत: ऐसा पहली बार है जब वह बाबा साहब के जन्मदिन को इतने बड़े पैमाने पर मनाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या द्वारा छोड़ी गयी फूलपुर सीट पर हाल में हुए उपचुनाव में बसपा के सहयोग से जीत हासिल करने वाली सपा के आंबेडकर के प्रति इस रुख को सियासी तकाजे के तौर पर देखा जा रहा है।

आंबेडकर की वैचारिक विरासत के आधार पर सियासी ताकत बनी बसपा हमेशा से बाबा साहब की जयन्ती को बड़े पैमाने पर मनाती आयी है। इस बार भी वह इसे भव्य रूप से मनाने जा रही है। दलित संगठनों द्वारा हाल में आहूत ‘भारत बंद‘ के दौरान हुई हिंसा के बाद सजग राज्य सरकार ने आंबेडकर जयन्ती पर किसी तरह का टकराव ना होने देने के लिये कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किये हैं। दरअसल, बाबा साहब के प्रति श्रद्धा जाहिर करने की होड़, प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा सरकारी दस्तावेजों में आंबेडकर का नाम सही करने को लेकर छिड़ी नयी सियासी बहस के बाद लगी है।

सरकार ने 28 मार्च को एक शासनादेश जारी करके प्रदेश के सरकारी रिकॉर्ड में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर का नाम ‘भीमराव रामजी आंबेडकर‘ के तौर पर दर्ज करने को कहा था। विपक्ष ने इस कदम की तीखी आलोचना की थी। उसके बाद यह एक सियासी मुद्दा बन गया। बसपा मुखिया मायावती ने राज्य सरकार के इस कदम को ‘दिखावटी’ और ‘सस्ती लोकप्रियता’ हासिल करने की कोशिश करार दिया था। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि जरूरी यह है कि भाजपा जहां आंबेडकर के नाम के साथ एक और नाम जोड़ रही है, वहीं वह उनके बताये मार्ग का अनुसरण भी करे। राज्य सरकार के प्रवक्ता स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा था कि जो लोग उनके सिद्धान्तों के दिखावे का छल करते हैं। वे उनका सही नाम ले ही नहीं पा रहे थे। आज वह सही तरीके से बुलाया जा रहा है। कम से कम जो सही किया गया है, विपक्ष उसकी सराहना करे।

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