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एक दशक में शादी न करने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या हुई दोगुनी, बच्चे न पैदा करने में भी आगे

साल 2011 के आंकड़ों के अनुसार 20 से 39 साल उम्र की 33 लाख 70 हजार मुस्लिम महिलाएं अविवाहित थीं।

Author December 15, 2016 1:49 PM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।

जीशान शेख

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 20 से 34 साल आयु वर्ग की मुस्लिम महिलाओं को दूसरे समुदायों की तुलना में तलाक दिए जाने की ज्यादा आशंका होती है। लेकिन इन आंकड़ों से एक और चिंताजनक बात सामने आती है कि नौजवान मुस्लिम महिलाओं में शादी करने की दर भी दूसरे समुदाय से कम है। साल 2011 के आंकड़ों के अनुसार 20 से 39 साल उम्र की 33 लाख 70 हजार मुस्लिम महिलाएं अविवाहित थीं। साल 2011 तक देश में कुल मुस्लिम महिलाओं की आबादी दो करोड़ 10 लाख थी यानी करीब 12.87 प्रतिशत महिलाएं अविवाहित थीं। पिछले हफ्ते ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन तलाक को गैर-संवैधानिक करार दिया है।

साल 2001 से साल 2011 की जनगणना के बीच 20-39 आयु वर्ग की बिना बच्चे वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या में 39 प्रतिशत बढ़ गई है। इस मामले में मुस्लिम महिलाएं केवल बौद्ध महिलाओं (45 प्रतिशत) से पीछे थीं। इसी आयु वर्ग की हिंदू महिलाओं में 2001 से 2011 के बीच ये दर 29.5 प्रतिशत रही। साल 2011 की जनगणना के अनुसार बिना बच्चों वाली विवाहित महिलाओं की संख्या पिछली जनगणना की तुलना में 31 प्रतिशत बढ़कर 2.73 करोड़ थी, जबकि 2001 की जनगणना में ऐसी महिलाओं की संख्या 2.08 करोड़ थी।

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सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार शहरी इलाकों में युवा मुस्लिम महिलाएं इन विकल्प का ज्यादा चुनाव कर रही हैं। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की संयोजक नूर जहां साफिया नीयाज कहती हैं, “समुदाय की सामाजिक आर्थिक स्थिति बदलने की वजह से महिलाएं ज्यादा चुनाव कर रही हैं। अब महिलाओं के पास पहले की तुलना में ज्यादा विकल्प उपलब्ध हैं।” इश्तराक एजुकेशन सोसाइटी की जनरल सेक्रेटरी और एसोसिएशन ऑफ मुस्लिम प्रोफेशनल्स की सदस्य रूबीना फिरोज कहती हैं, “ये चलन ग्रामीण इलाकों में शायद न हो लेकिन शहरी इलाकों में मुस्लिम महिलाएं पहले से ज्यादा सशक्त  हुई हैं।”

साल 2001 से साल 2011 के जनगणना के आंकड़ों के अनुसार 20 से 39 आयु वर्ग की मुस्लिम महिलाओं में शादी न करने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या करीब दोगुनी हो गई। 2001-2011 के दशक में विवाह न करने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या में 94 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जो दूसरे समुदायों की तुलना में काफी अधिक है।  2001-2011 के दशक में शादी न करने वाली बौद्ध महिलाओं की संख्या में 72.78 प्रतिशत, हिंदू महिलाओं में 69.13 प्रतिशत और सिख महिलाओं में 66.21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

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