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भ्रष्टाचार पर पीएम को चिट्ठी लिखने वाले जज रिटायर, नहीं दी गई विदाई, सीनियर रजिस्ट्रार ने रद किया समारोह का नोटिस

अवध बार एसोसिएशन ने हालांकि बाद में जस्टिस पांडेय का बार में स्वागत किया और उन्हें विदाई दी। इस मौके पर जस्टिस पांडेय ने उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया की आलोचना की।

Author नई दिल्ली | Published on: July 5, 2019 9:41 AM
जस्टिस रंगनाथ पांडेय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (image source-allahabad high court/pti)

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के जज रंगनाथ पांडेय गुरुवार (4 जुलाई, 2019) को रिटायर्ड हो गए। मगर पहले से तय उनके विदाई समारोह को रद्द कर दिया गया। हाईकोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार मानवेंद्र सिंह द्वारा जारी नोट में इस बात की पुष्टि करते हुए कहा गया कि जस्टिस रंगनाथ पांडेय के लिए आयोजित विदाई समारोह का जो नोटिस एक जुलाई को जारी किया गया उसे कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों की वजह से वापस लिया जा रहा है। सिंह ने एक जुलाई को नोटिस जारी कर अवध बार एसोसिएशन, सॉलिसिटर जनरल, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को सूचना दी थी कि जस्टिस पांडेय चार जुलाई को रिटायर्ड हो रहे हैं। इस मौके पर उन्हें चीफ जस्टिस की अदालत के कक्ष में विदाई दी जाएगी। रिटायर्ड हो रहे जजों को इस तरह विदाई समारोह के जरिए सम्मानित करना कोर्ट की एक पुरानी परंपरा रही है।

अवध बार एसोसिएशन ने हालांकि बाद में जस्टिस पांडेय का बार में स्वागत किया और उन्हें विदाई दी। इस मौके पर जस्टिस पांडेय ने उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया की आलोचना की। विदाई समारोह में अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ए एम त्रिपाठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस पी सिंह, संयुक्त सचिव रिषभ त्रिपाठी, अशोक साहू के अलावा कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं सहित सहायक सॉलिसिटर जनरल एस पी पांडेय मौजूद रहे।

बता दें कि जस्टिस पांडेय हाल ही में उस समय सुर्खियों में आये थे, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कथित रूप से एक निजी पत्र भेजा। इस पत्र में न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया की आलोचना की गई थी। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि जजों की नियुक्ति में भाई-भतीजा और जातिवाद को तरजीह दी जाती है।

उन्होंने अपने पत्र में कॉलेजियम के जरिए जजों की नियुक्ति का एकमात्र प्रचलित मानदंड भाई-भतीजा व जातिवाद बताया था। पत्र में उन्होंने लिखा है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों का चयन बंद कमरों में चाय की दावत पर किया जाता है, जिसका मुख्य आधार जजों की पैरवी और उनका पसंदीदा होना ही है। जस्टिस पांडेय ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में न्यायपालिका की गरिमा फिर से बहाल करने की मांग की है। (भाषा इनपुट)

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