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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 6 छात्रों के एक ग्रुप ने उठाई झुग्गियों के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी

यह ग्रुप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को शिक्षा में मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रभावित होकर बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रहा है।

Author इलाहाबाद | February 28, 2017 5:31 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने देश में शिक्षा में अपना योगदान देने की शुरुआत की है। यह 6 लोगों का ग्रुप झुग्गीयों में जाकर गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा है। यह ग्रुप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को शिक्षा में मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रभावित होकर बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रहा है। इस ग्रुप ने अपनी कक्षा का नाम हमारी पाठशाला रखा है। यह ग्रुप करीब 110 बच्चों को अंग्रेजी, गणित और हिंदी पढ़ाता है। इस ग्रुप का नेतृत्व रजनीश दुबे करते हैं जो कि मिर्जापुर के रहने वाले हैं। रजनीश शारीरिक रूप से कमजोर हैं और वे पिछले तीन सालों से गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं।

रजनीश और उनके दोस्त अलोपीबाग और जियॉर्ज टाउन में बच्चों को पढ़ाने के लिए जाते हैं। ये सभी छात्र विश्वविद्यालय में अपनी क्लास लेने के बाद बच्चों को पढ़ाने के लिए जाते हैं, जहां पर ये उन बच्चों को कॉपी, पेंसिल समेत पढ़ाई की कई चीजें मुहैया कराते हैं। वहीं रजनीश ने बताया कि हमारी पाठशाला से प्रभावित होकर स्नातक की पढ़ाई कर रहे कुछ छात्रों ने आस-पास के जिलों के गरीब बच्चों को पढ़ाना शुरु किया है। रजनीश ने कहा कि हमने बच्चों को पढ़ाने का समय दोपहर के 2 बजे का रखा हुआ है। उन्होंने कहा कि जैसे ही हम बच्चों को पढ़ाने के लिए पहुंचते हैं तो बच्चों में पढ़ने का जो उत्साह दिखाई देता उससे हमें बहुत खुशी मिलती है।

रजनीश ने बताया कि एक दिन हमने हनुमान मंदिर के बाहर गरीब बच्चों को भीख मांगते देखा और सोचा कि इसके लिए कोई उपाय निकालना होगा। इसके बाद हमने सोचा कि क्यों न इन बच्चों को पढ़ा कर इनका भविष्य संवारा जाए जिससे कि ये फिर कभी भीख नहीं मांग पाए। वहीं एक छात्र राजीव दुबे ने शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा रही होती तो झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को भीख न मांगनी पड़ती। छात्रों का कहना है कि हम बच्चों को अच्छा शिक्षित कर उनका भविष्य सुधारना चाहते हैं। देश को मजबूत बनाने के प्रति हमारी भी कुछ जिम्मेदारियां है, इसलिए हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

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