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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को लगाई लताड़, कहा- आप लोगों को मांसाहार से नहीं रोक सकते, बूचड़खाने बनवाइए

याचिका में आरोप लगाया था कि उसका लाइसेंस 31 मार्च को खत्म हो गया लेकिन लाइसेंस के नवीनीकरण का आवेदन देने के बाद भी सरकार उसे रिन्यू नहीं कर रही है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को लताड़ लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि आप लोगों को मांसाहार से नहीं रोक सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर राज्य में वैध बूचड़खाने नहीं हैं तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो वैध बूचड़खाने बनवाए। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 17 जुलाई तक लोगों को स्लाउटर हाउस का लाइसेंस जारी करे। मामले की अगली सुनवाई अब 17 जुलाई को होगी।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि नए लाइसेंस जारी होने और पुराने लाइसेंस रिन्यू होने तक सभी बूचड़खाने बंद रहेंगे। इसके अलावा कोर्ट ने सभी मीट कारोबारियों को कहा कि वे लोग 17 जुलाई तक अपने-अपने जिले के जिलाधिकारी कार्यालय या जिला पंचायत कार्यालय के पास लाइसेंस के लिए आवेदन करें। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को कहा है कि वो 17 जुलाई को बताए कि इस दौरान कितने लाइसेंस जारी किए गए और कितने लाइसेंस को रिन्यू किया गया।

याचिकाकर्ता ने याचिका में आरोप लगाया था कि उसका लाइसेंस 31 मार्च को खत्म हो गया लेकिन लाइसेंस के नवीनीकरण का आवेदन देने के बाद भी सरकार उसे रिन्यू नहीं कर रही है। याचिकाकर्ता ने मांग की  थी कि उसके लाइसेंसों का नवीनीकरण किया जाए। गौरतलब है कि यूपी में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अवैध बूचड़खानों को बंद करने का आदेश दिया था।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों में अवैध बूचड़खानों के खिलाफ मुहिम शुरू किये जाने के बीच सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि देश में केवल 1,707 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत हैं। सबसे ज्यादा पंजीकृत बूचड़खाने वाले सूबों की फेहरिस्त में क्रमश: तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष तीन स्थानों पर हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश और चंडीगढ़ समेत आठ राज्यों में एक भी बूचड़खाना पंजीकृत नहीं है।

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