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दलित के घर हलवाई का खाना खा घिरे योगी सरकार के मंत्री सुरेश राणा, मिनरल वॉटर भी मंगवाने का आरोप

सोमवार को सुरेश राणा एक दलित परिवार के घर भोजन करने गए थे। आरोप है कि उन्होंने दलित परिवार के बजाए हलवाई द्वारा तैयार खाना खाया।

Author Updated: May 2, 2018 7:54 AM
भारतीय जनता पार्टी के विधायक और योगी सरकार में मंत्री सुरेश राणा।

पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने विधायकों और मंत्रियों को दलित बहुल इलाकों में जाने और वहां वक्त गुजारने का निर्देश दिया था। मकसद दलित समुदाय के पार्टी के प्रति कथित तौर पर टूट रहे भरोसे को दोबारा हासिल करना था। हालांकि, इस कवायद का हिस्सा बनने के दौरान यूपी के योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री सुरेश राणा एक विवाद में फंस गए। सोमवार को वह एक दलित परिवार के घर भोजन करने गए थे। आरोप है कि उन्होंने दलित परिवार के बजाए हलवाई द्वारा तैयार खाना खाया। राणा और कई बीजेपी नेता अलीगढ़ जिले के लौहगढ़ के रहने वाले रजनीश कुमार के घर रात करीब 11 बजे पहुंचे। रजनीश को बिलकुल नहीं पता था कि उनके घर मंत्री जी आने वाले हैं।

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट ने रजनीश के हवाले से बताया है कि मंत्री को बिलकुल नहीं पता था कि वह किसके घर जाने वाले हैं। इसके अलावा, सभी कुछ पहले से बनाई योजना के तहत किया गया। रजनीश के मुताबिक, उन्हें घर में बैठने के लिए कहा गया। रात का खाना बाहर से मंगवाया गया। खाने में दाल मखनी, मटर पनीर, पुलाव, तंदूरी रोटी और मीठे में गुलाबजामुन मंगवाया गया था। इसके अलावा, मिनरल वॉटर भी साथ लाया गया था। रजनीश ने बताया कि बस औपचारिकताएं निभाई गईं। इस बारे में जब राणा से पूछा गया तो उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि उनके साथ करीब 100 लोग गए थे, इसलिए खाना हलवाई के पास से मंगवाया गया। राणा ने कहा, ‘मैंने उनके ड्रॉइंग रूम में खाना खाया। भोजन परिवार के सदस्यों के अलावा हलवाई के द्वारा भी तैयार किया गया था।’

पीएम नरेंद्र मोदी के विजन के तहत बीते महीने बीजेपी ने ‘ग्राम स्वराज अभियान’ की शुरुआत की है। बीजेपी आलाकमान ने अपने सांसदों, विधायकों और केंद्रीय मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे 50 प्रतिशत से ज्यादा दलित आबादी वाले इलाकों में कम से कम एक रात गुजारें। पीएम ने यह भी निर्देश दिया था कि लोगों को सरकार द्वारा चलाई जा रहीं जनकल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी जाए। दरअसल, हाल ही में हुए भारत बंद के दौरान पार्टी के प्रति दलित समुदाय का गुस्सा नजर आया था। इसके अलावा, बीजेपी के ही कुछ दलित नेताओं ने समुदाय की अनदेखी और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इस साल विधानसभा जबकि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी डैमेज कंट्रोल मोड में आ चुकी है।

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