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यूपी: योगी आदित्य नाथ राज में अब नहीं चलेंगी “मुलायम सिंह यादव ट्रैवेल्स” और “लालू यादव ट्रांसपोर्ट” की बसें

आगरा और फिरोजाबाद की सड़कों पर दौड़ने वाली इन बसों के पास जरूरी कागजात या परमिट नहीं होते लेकिन नेताओं के करीबी होने के दावों के दम पर चलती है गाड़ी।

यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद जब गोरखपुर के भाजपा सांसद योगी आदित्य नाथ पहली बार  संसद आए तो उन्होंने एक नोंकझोंक के दौरान कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से कहा, “बहुत जल्द उत्तर प्रदेश में बहुत कुछ बंद होने वाला है।” अपने बयान के एक हफ्ते के अंदर सीएम योगी ने प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में पान-गुटखा खाना, राज्य में चलने वाले अवैध बूचड़खाने, लाल बत्ती वाली गाड़ियां इत्यादि बंद करवा दीं। काम में लापरवाही के आरोप में करीब 10 पुलिसवालों को निलंबित किया जा चुका है। योगी के निर्देश पर सूबे में एक एंटी-रोमियो स्कवैड भी बनाया गया है जो अभी तक अपनी हरकतों से मीडिया की सुर्खियों में है। “बंद होने” की कड़ी में नया नाम यूपी के आगरा और फिरोजाबाद की सड़कों पर दौड़ने वाली कुछ खास बसों का जुड़ सकता है। स्थानीय लोग इन्हें “नेता बस” कहते हैं। आम तौर पर इन बसों को पास जरूरी कागजात या परमिट नहीं होता लेकिन राजनीतिक पहुंच कारण वो सड़कों पर मजे से दौड़ती हैं और कमायी करती हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार “मुलायम सिंह यादव ट्रैवेल्स” और लालू प्रसाद यादव ट्रांसपोर्ट इत्यादि नाम से चलने वाली ऐसी बसें और योगी राज में बंद हो सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार आगरा में करीब 70 और फिरोजाबाद में करीब 200 ऐसी बसें चलती हैं। इनके मालिक ट्रैफिक नियमों और दूसरे नियम-कायदों के उल्लंघन के लिए बड़े नेताओं के नाम का प्रयोग करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार ऐसी बसों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जो कानूनी रास्तों पर नहीं आएंगी उन्हें रास्तों से हटना पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार परिवहन विभाग को ऐसी बसों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

आगरा रोडवेज के एक अधिकारी ने ईटी को बताया कि इटावा, मैनपुरी, एटा, लखनऊ, दिल्ली और अलीगढ़ के रास्तों पर चलने वाली ऐसी बसें परिवहन विभाग के लिए बहुत पहले से सिरदर्द रही हैं। अधिकारी के अनुसार ऐसी बसों की वजह से रोडवेज को हर महीने 30-35 प्रतिशत आमदनी का नुकसान होता है। इन बसों पर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने और बदसलूकी के भी आरोप लगते रहे हैं।

आगरा के परिवहन विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने अखबार से कहा कि अब ऐसी बसें अपवाद ही हैं। अधिकारी ने बताया कि केवल मार्च में करीब 60 बसों पर जुर्माना लगाकर छह लाख रुपये से अधिक वसूले जा चुके हैं। वहीं फिरोजाबाद में करीब 30 ऐसी बसों पर जुर्माना लगाया गया और 3.5 लाख रुपये वसूले गए। रिपोर्ट के अनुसार आगरा के पुलिस एसपी ने आदेश जारी किया है कि शहर की सड़कों पर बगैर परमिट वाली कोई भी बस नहीं चलनी चाहिए।

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