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नकदी संकट से मरीज ही नहीं डाक्टर भी परेशान, चेक हो रहे हैं बाउंस

इस तरह की घटनाएं सामने आने के बाद डॉक्टर भी पहले नकद जमा करा रहे हैं, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान के बाद ही इलाज शुरू कर रहे हैं।
Author आगरा | December 13, 2016 04:25 am
पांच सौ और हजार रुपए की नोटबंदी के अच्छे नतीजे तो जाने कब दिखाई देंगे, मगर उसके खराब पहलू पूरी तरह सामने आ गए हैं।

नोटबंदी से स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुईं हैं। कैशलेस मरीजों के परिजनों की ओर से चेक से किए भुगतान से डॉक्टर और मरीज के बीच का भरोसा भी टूट रहा है। हॉस्पिटल के बिल का भुगतान चेक से किया गया, लेकिन चेक बाउंस हो गया। इस कड़वे अनुभव को आगरा के एक डॉक्टर ने अपने फेसबुक पोस्ट पर साझा किया है।
आगरा के डॉ राकेश मोहनिया ने अपने फेसबुक वॉल पर 11 दिसंबर को एक पोस्ट की है। इसमें उन्होंने बताया है कि उनके हॉस्पिटल ईश्वरी देवी नर्सिंग होम में मरीज भर्ती हुआ। उसका बिल 6500 रुपए था, नोटबंदी के चलते नए नोटों की समस्या आ रही है। मरीज के तीमारदार की ओर से 6500 रुपए का चेक दिया गया। यह चेक उन्होंने एक दिसंबर को बैंक में दिया। दो दिसंबर को बैंक की तरफ से चेक वापस कर दिया गया। इसमें चेक के स्वीकार नहीं किए जाने का कारण खाते में पैसे का नहीं होना बताया गया।

भले ही इस तरह के मामले कम हैं, लेकिन यह भरोसा मजबूत करने के बजाय तोड़ने का काम कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएं सामने आने के बाद डॉक्टर भी पहले नकद जमा करा रहे हैं, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान के बाद ही इलाज शुरू कर रहे हैं, इससे सामान्य लोगों को समस्या आने लगी है। शहर के कुछ क्लीनिक पर कंपाउंडर पहले ही मरीज से पूछ लेते हैं कि नए नोट हैं या नहीं, जिनके पास रुपए नहीं होते उनसे मना कर दिया जाता है। इसके चलते लोग परेशान हैं। उन्हें इलाज के लिए क्लिनिकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस स्थिति में सरकारी इलाज से लोगों को मदद मिल सकती है, लेकिन इसमें भी परेशानियां कम नहीं। लोगों ने बताया कि एसएन मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल की लंबी लाइन के बाद नंबर आता है तो डाक्टर चैंबर में नहीं होते हैं। जूनियर डाक्टर इलाज करते हैं, जांच के लिए इधर- उधर भटकना पड़ता है। एक सामान्य मरीज को अपना इलाज कराने के लिए दो से तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके बाद जांच और दवाओं का खर्च खुद उठना पड़ रहा है। इसलिए मरीज सरकारी इलाज के बजाय निजी क्लीनिक पर ही इलाज करा रहे हैं।
एटीएम रहे कैशलेस, लोग परेशान

एटीएम का फ्लॉप शो जारी रहा। सोमवार को भी ज्यादातर मशीनें नोट नहीं उगल पाईं। कई एटीएम पर नो कैश के साथ मशीन खराब के होने के बोर्ड भी देखे गए। रुपयों के लिए लोग एक एटीएम से दूसरे तक दौड़ लगाते रहे। छुट्टी के चलते बैंकों के बंद होने की वजह से आमजनों की परेशानियां और बढ़ गई है। ऐसे में एटीएम में पैसे नहीं होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। संजय प्लेस, एमजी रोड सहित शहर की ज्यादातर मशीनें कैशलेस रहीं। जिन एटीएम में नकद थी, वहां कतारें इतनी लंबी थी कि कई लोगों को नोट पाने की हसरत दिल में लेकर घर लौटना पड़ा। यूनियन बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि चेस्ट ब्रांच से सुबह 10 बजे के बाद ही नकद की डिलीवरी हो पाएगी। एटीएम तक कैश पहुंचाने में एक घंटे का समय लग सकता है। इसलिए 11 बजे के बाद ही पैसे मिल पाएंगे। तीन दिनों के बाद बैंक खुलने पर बैंकों में भारी भीड़ जुटने की संभावना जताई गई है।

 

 

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