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लखनऊ: कान्हा उपवन में 6 महीने के भीतर 499 जानवरों की मौत, NGO ने कहा- फंड नहीं दे रही सरकार

कान्हा उपवन में पिछले 6 महीनों के अंदर करीब 499 आवारा जानवरों ने दम तोड़ दिया है और इन मरने वाले जानवरों में ज्यादा संख्या गायों की ही है। इसके अलावा यह भी खबर आ रही है कि हजारों आवारा जानवर अब बेघर भी हो सकते हैं।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार सत्ता में आने के बाद से ही गोरक्षा को प्राथमिकता देती आ रही है, इसके बावजूद भी लखनऊ के कान्हा उपवन की हालत लगातार बिगड़ती ही जा रही है। कान्हा उपवन में पिछले 6 महीनों के अंदर करीब 499 आवारा जानवरों ने दम तोड़ दिया है और इन मरने वाले जानवरों में ज्यादा संख्या गायों की ही है। इसके अलावा यह भी खबर आ रही है कि हजारों आवारा जानवर अब बेघर भी हो सकते हैं।

रिपोर्ट्स हैं कि आवारा जानवरों का घर बन चुके कान्हा उपवन का संचालन करने वाले एनजीओ ‘जीवाश्रय’ ने संचालन का काम छोड़ने की घोषणा कर दी है। जीवाश्रय के पास जानवरों के चारे के लिए पर्याप्त पैसे नहीं है। एनजीओ ने अपनी असमर्थता लखनऊ नगर निगम और राज्य सरकार के ‘गौ सेवा आयोग’ को बता दी है। एनजीओ का कहना है कि वह 4 नवंबर से ज्यादा समय तक कान्हा उपवन का संचालन नहीं कर सकता।

जीवाश्रय ने बताया कि उसे जानवरों के चारे के लिए अप्रैल महीने से पशुपालन विभाग से कोई पैसे नहीं मिले हैं, ऐसे में जानवरों के शेल्टर होम का संचालन करना दिन प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। जीवाश्रय के सचिव यतेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि एनजीओ के ऊपर पहले से ही 2 करोड़ का कर्ज है, ऐसे मैं जानवरों के शेल्टर होम का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। त्रिवेदी ने कहा, ‘जब हमने कान्हा उपवन के संचालन की जिम्मेदारी ली थी तब वहां केवल 600 पशु ही थे, लेकिन आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ते गई और अब कान्हा उपवन में करीब 2700 पशु हैं। हमें पशुपालन विभाग से कोई फंड नहीं मिल रहा है ऐसे में हम कैसे उपवन का संचालन करें।’

सचिव यतींद्र त्रिवेदी ने यह भी बताया कि 2016-2017 के लिए सरकार की तरफ से कान्हा उपवन को 2.50 करोड़ का बजट मिला था, लेकिन वह बजट 30 मार्च 2017 को ही खत्म हो गया, जिसके बाद इस बात की सूचना नगर निगम को दी गई, लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली. यतींद्र त्रिवेदी ने बताया कि पिछले 6 महीनों से 3000 से ज्यादा जानवरों को आधा पेट भोजन ही मिल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एनजीओ ने आकलन करके इस साल के लिए 3.5 करोड़ के फंड की मांग की थी, लेकिन पशुपालन विभाग ने फंड देने से इंकार कर दिया।

इसके अलावा आपको बता दें कि 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच 6 महीनों में करीब 499 जानवरों ने दम तोड़ दिया है। वहीं इन जानवरों की मौत पर अभी तक कोई जांच नहीं हुई है, ना ही जानवरों के शव का पोस्ट मार्टम हुआ। कान्हा उपवन के अधिकारियों का कहना है कि यहां जानवर बहुत ही बुरी स्थिति में लाए जाते हैं, कोई सड़क दुर्घटना का शिकार होता है, तो कोई बीमार होता है और बाकी की उम्र काफी ज्यादा होती है। कान्हा उपवन के मैनेजर अमित सहगल का कहना है कि अभी तक किसी भी गाय की मौत भूख की वजह से नहीं हुई है।

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