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फर्रुखाबाद: महीने भर में 49 नवजातों की मौत, FIR की धमकी पर डॉक्टरों ने दी हड़ताल की बात

तहरीर के मुताबिक मृत शिशुओं के परिजनों ने जांच अधिकारी को फोन पर बताया था कि डॉक्टरों ने बच्चों को समय पर आॅक्सीजन नहीं लगाई और न ही कोई दवा दी, जिससे स्पष्ट है कि अधिकतर शिशुओं की मृत्यु पर्याप्त मात्रा में आॅक्सीजन न मिलने के कारण हुई।

Author फर्रुखाबाद / लखनऊ  | September 5, 2017 1:16 AM
गोरखपुर अस्पताल की ये तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो गयी थी। (एक्सप्रेस फोटो)

फर्रुखाबाद जिला संयुक्त अस्पताल में एक महीने के दौरान 49 नवजात की मौत के मामले में प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सोमवार जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी तथा जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का तबादला कर दिया।  जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में आॅक्सीजन की कमी तथा इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप में रविवार रात शहर कोतवाली में नगर मजिस्ट्रेट जैनेंद्र कुमार जैन की तहरीर पर मुख्य चिकित्साधिकारी तथा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं अन्य के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है। सरकार के इस रुख के बाद डॉक्टरों के संघ ने सामूहिक अवकाश और इस्तीफे की धमकी दी तो सरकार ने स्पष्ट किया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्साधीक्षक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। दूसरी ओर सरकार ने अपना रुख बदलते हुए यह भी साफ किया कि आॅक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है।
सोमवार को पहले राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि घटना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने फर्रुखाबाद के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी तथा जिला महिला चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर फर्रूखाबाद में डाक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज होने पर नाराजगी जाहिर करते हुए उत्तर प्रदेश चिकित्सा सेवा संघ (यूपीपीएमएस) ने सोमवार फैसला लिया है कि इस मुद्दे पर जिले के सभी डॉक्टर पांच और छह सितंबर को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और अगर डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज कराया गया मामला वापस न लिया गया तो सात सितंबर को सामूहिक त्यागपत्र देंगे।

चिकित्सा सेवा संघ फर्रूखाबाद इकाई के सचिव डॉ योगेंद्र सिंह ने बताया कि मामले में गठित सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम की कमेटी को कोई तकनीकी जानकारी नहीं है और गलत रिपोर्ट दी गई है। उन्होंने कहा कि सोमवार हुई बैठक में यह फैसला लिया गया कि सभी डॉक्टर पांच और छह सितंबर को सार्वजनिक अवकाश पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो जिले के सभी डॉक्टर सात सितंबर को सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। उत्तर प्रदेश चिकित्सा सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ अशोक यादव ने लखनऊ में बताया कि जिस रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, वह गैर तकनीकी लोगों द्वारा बनाई गई है। अगर इस मामले की जांच करानी थी तो विशेषज्ञों की कमेटी गठित की जानी चाहिए। यह डॉक्टरों को परेशान करने का प्रयास है जो विपरीत परिस्थतियों में काम करते हैं।

दरअसल मीडिया में खबर आने के बाद जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने मुख्य चिकित्साधिकारी उमाकांत पांडेय की अध्यक्षता में समिति बनाकर जांच कराई। समिति के निष्कर्षों से संतुष्ट न होने के बाद जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेट जांच कराई थी, जिसके आधार पर आरोपी चिकित्साधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामला दर्ज कराने वाले नगर मजिस्ट्रेट जैनेंद्र जैन द्वारा दी गई तहरीर के मुताबिक मुख्य चिकित्साधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा दी गई 30 मृत बच्चों की सूची में से ज्यादातर की मौत का कारण ‘पैरीनेटल एस्फिक्सिया’ बताया गया है। तहरीर के मुताबिक मृत शिशुओं के परिजनों ने जांच अधिकारी को फोन पर बताया था कि डॉक्टरों ने बच्चों को समय पर आॅक्सीजन नहीं लगाई और न ही कोई दवा दी, जिससे स्पष्ट है कि अधिकतर शिशुओं की मृत्यु पर्याप्त मात्रा में आॅक्सीजन न मिलने के कारण हुई। आॅक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति न होने पर शिशुओं की मौत की संभावना के बारे में अन्य डॉक्टरों को भी जानकारी रही होगी।’

प्रवक्ता के अनुसार स्वास्थ्य महानिदेशक ने कहा कि पैरीनेटल एस्फिक्सिया के कई कारण हो सकते हैं। मुख्यत: प्लेसेंटल रक्त प्रवाह की रुकावट भी हो सकती है। सही कारण तकनीकी जांच के माध्यम से ही स्पष्ट हो सकता है। प्रवक्ता ने कहा कि शासन स्तर से टीम भेजकर जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों की मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। इस बीच, फर्रुखाबाद से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जिलाधिकारी रवींद्र कुमार के निर्देश पर नगर मजिस्ट्रेट जैनेंद्र कुमार जैन तथा उपजिलाधिकारी सदर अजीत कुमार सिंह ने मौके पर जाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी की। जांच में पाया गया कि आॅक्सीजन न मिल पाने और इलाज में लापरवाही के कारण बच्चों की मौत हुई थी।मगर जल्दी ही उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को ही साफ कर दिया कि फर्रूखाबाद जिला अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) और मुख्य चिकित्साधीक्षक (सीएमएस) के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। सरकार ने यह भी साफ किया कि आॅक्सीजन की कमी की वजह से कोई मौत नहीं हुई है।

प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) प्रशांत त्रिवेदी ने कहा कि जिस तरह से यह मामला पेश किया गया, उस तरह की घटना यह नहीं है। फर्रूखाबाद में रविवार रात सीएमओ और सीएमएस के खिलाफ प्राथमिकी हुई है लेकिन इसके आधार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पहले हम इस मामले की जांच करेंगे। उसके बाद ही कोई कार्रवाई करेंगे। सीएमओ उमाकांत पांडेय और सीएमएस अखिलेश अग्रवाल को हटाने की बाबत पूछे गए सवाल पर त्रिवेदी ने कहा कि जिलाधिकारी जिला प्रशासन प्रमुख होता है। उन्हें जिलाधिकारी के साथ तालमेल बिठाकर काम करना चाहिए। अगर कोई मामला था तो उन्हें प्रशासन की जानकारी में लाना चाहिए था। वास्तव में वहां मेडिकल की गलती की वजह से कुछ हुआ या तकनीकी गलती से कुछ हुआ तो यह जांच में साफ हो जाएगा। उनसे पूछा गया कि क्या बच्चों की यह मौतें आक्सीजन की कमी की वजह से हुई तो उन्होंने कहा- हम आॅक्सीजन को लेकर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रहे हैं जबकि ऐसा कुछ नहीं था।प्रमुख सचिव (सूचना) अवनीश अवस्थी ने कहा- ऐसा लगता है कि जिलाधिकारी, सीएमओ और सीएमएस के बीच आपसी तालमेल नहीं था। इसलिए इन लोगों को हटाया गया है। महानिदेशक स्वास्थ्य इस मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम वहां भेज रहे हैं और एक बात पूरी तरह से साफ है कि आक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है।

 

 

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