19 female missing from Hardoi Shelter Home in up - उत्तर प्रदेश: हरदोई शेल्टर होम से गायब मिलीं 19 महिलाएं, जांच के आदेश - Jansatta
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उत्तर प्रदेश: हरदोई शेल्टर होम से गायब मिलीं 19 महिलाएं, जांच के आदेश

बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह और यूपी के देवरिया स्थित शेल्टर होम के बाद कुछ इसी तरह का मामला हरदोई से सामने अाया है। यहां भी जांच के क्रम में शेल्टर होम से 19 महिलाएं गायब मिली।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्म्क तौर पर किया गया है (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बालिका आश्रय गृह और उत्तर प्रदेश के देवरिया स्थित शेल्टर होम के बाद कुछ इसी तरह का मामला हरदोई से सामने अाया है। हरदोई के बेलागंज में चल रहे शेल्टर होम में जांच के दौरान 19 महिलाएं गायब मिली। पूछताछ के दौरान वहां मौजूद शेल्टर होम अधीक्षिका संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए डीएम पुलकित खरे ने शेल्टर होम को मिल रही अनुदान राशि पर रोक लगा दी है। शेल्टर होम की संचालिका और संस्थापक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है।

गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बालिका आश्रय गृह के बाद देवरिया शेल्टर होम में रह रही लड़कियों के साथ हैवानियत का मामला उजागर होने के बाद योगी सरकार ने सख्त निर्णय लिया है। सरकार ने तत्काल सभी डीएम को पूरे राज्य में चल रहे शेल्टर होम की जांच करने एवं उसकी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। इसी क्रम में हरदोई जिले में चल रहे शेल्टर होम की जांच की गई। इस शेल्टर होम का संचालन आयशा ग्रामोद्योग द्वारा किया जा रहा था।

 

जांच के दौरान डीएम ने पाया कि यहां के रजिस्टर में 21 महिलाओं के नाम दर्ज हैं। लेकिन जब उन्हें हाजिर करवाने को कहा गया तो मात्र दो महिलाएं की हाजिर हो पाई। यही नहीं, जब शेल्टर होम की जांच की गई तो कई तरह की खामियां सामने आयी। न तो वहां रहने को पर्याप्त कमरे थे और न हीं साफ-सफाई। बस रजिस्टर में शेल्टर होम चलाया जा रहा था। डीएम ने जब शेल्टर होम इंचार्ज से पूछताछ की तो वो गोलमोल जवाब देने लगी। कभी कहा कि महिलाएं मंदिर गई हैं तो कभी बताया कि वे अस्पताल गई हैं। इसके बाद डीएम ने तत्काल कार्रवाई होते हुए इसके फंडिंग पर रोक लगा दी। साथ ही इसकी रिपोर्ट भेज दी गई। हरदोई शेल्टर होम में 19 महिलाओं के गायब होने की खबर से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां फर्जी आंकड़ा दिखा कर अनुदान राशि ली जा रही थी। अासपास की गांव में रहने वाली महिलाओं के नाम रजिस्टर में लिखे हुए थे।

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