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VIDEO: सामान्‍य बोगी में लेटा था पुलिसकर्मी, परेशान मुसाफिर ने बैठने की जगह मांगी तो जड़ा थप्पड़, बेल्ट दिखा कर धमकाया

ट्रेन की खचाखच भरी सामान्य बोगी में पुलिसकर्मी लेटकर दिल्ली तक आ गया। गर्मी में नीचे पसीने से तर-बतर बैठी महिलाएं-बच्चों को देख वह न पसीजा। खाली सीट देख अचानक एक यात्री ने उससे साथ बैठाने को कहा, तो पुलिसकर्मी ने गुंडई दिखाई। पूरा सफर पुलिसकर्मी ने इसी गुंडई के बलबूते सोकर तय किया, जबकि ढेर सारे यात्री उसी बोगी में खड़े होकर दिल्ली आने पर मजबूर हुए।

Author May 29, 2018 11:00 am
उत्तर प्रदेश पुलिस का सिपाही कुछ इस तरह बेल्ट के बलबूते पर रौब झाड़ रहा था।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक सिपाही द्वारा ट्रेन में अमानवीयता दिखाने का मामला सामने आया है। अनारक्षित बोगी में वह लेट कर कानपुर से दिल्ली तक आ गया। गर्मी में पसीने से तर-बतर बैठी महिलाओं और बच्‍चों को देख कर भी न पसीजा। उल्‍टे बैठाए जाने का अनुरोध करने पर एक मुसाफिर को थप्‍पड़ जड़ दिया और बेल्‍ट दिखा कर धमकाया। कहा- दफा हो जाओ, नहीं तो मार-मार कर गिरा दूंगा।

रविवार (27 मई) को 40 वर्षीय अखिलेश कुमार नई दिल्ली जाने के लिए कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले अखिलेश दिल्ली में बुरादे का काम करते हैं। वह प्लैटफॉर्म संख्या-एक पर श्रमशक्ति एक्सप्रेस की सामान्य बोगी में किसी तरह घुसे। बोगी में एक जगह उन्‍होंने देखा कि ऊपर सामान रखने वाली जगह पर एक पुलिसकर्मी लेटा था। मदद के नाम पर उन्होंने बैठने के लिए थोड़ी सी जगह मांगी। पहले तो पुलिसकर्मी ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। पर जब अखिलेश ने बार-बार टोका तो वह उबल पड़ा।

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पुलिसकर्मी बोला- यहां से चलते बनो, नहीं तो मार-मार गिरा दूंगा। अखिलेश ने मनुहार जारी रखी। इस पर पुलिसकर्मी ने उन्‍हें थप्पड़ जड़ दिया। यही नहीं, अपनी वर्दी वाली बेल्ट दिखा कर धमकाते हुए उसे बोला, “दफा हो जा यहां से, नहीं तो मार-मार कर गिरा दूंगा। गंदे आदमी से मैं दूरी बना कर रखता हूं। ज्यादा होशियारी न दिखाओ।”

पुलिसकर्मी की उद्दंडता देख कर अखिलेश सहम गए। पर सिपाही की अकड़ कायम रही। जब कुछ यात्रियों ने पूछा कि आखिर थोड़ी सी जगह देने में क्‍या परेशानी है? इस पर जवाब मिला, “मेरे बैठाने से सबकी परेशानी दूर हो जाए, तो मैं बैठा लूं। लगातार सफर करते हुए आ रहा हूं। कोई महिला होती या कोई और होता, तो अच्छा भी लगता।” पुलिसकर्मी साढ़े छह घंटे के सफर के दौरान कमीज-बेल्ट उतारकर सीट पर आराम फरमाता रहा, जबकि अन्य यात्री बैठने-खड़े होने के लिए जिद्दोजहद करते रहे।

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