उत्तर प्रदेश की चर्चित तुलसीपुर विधानसभा सीट पर सभी की नजरें 2027 में रहने वाली है। 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की नजर तुलसीपुर विधानसभा सीट पर जीत का हैट्रिक लगाने की होगी। बता दें कि 2008 में परिसीमन के बाद ही यह सीट अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर अब तक तीन बार चुनाव हो चुके हैं, जिसमें से दो बार बीजेपी और एक बार सपा ने जीत दर्ज की है।

तुलसीपुर विधानसभा सीट बलरामपुर जिले और श्रावस्ती लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है। इस सीट पर मुस्लिम आबादी काफी अच्छी संख्या में है। पिछले चुनाव में यहां से बीजेपी के कैलाश नाथ शुक्ला ने बड़ी जीत दर्ज की थी। हालांकि समाजवादी पार्टी को बगावत से नुकसान हुआ था।

2022 में सपा को बगावत से हुआ था नुकसान

2022 के विधानसभा चुनाव में तुलसीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के कैलाश नाथ शुक्ला को 87032 वोट मिले थे। वहीं सपा से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार जेबा रिजवान को 51251 वोट मिले थे। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के अब्दुल खान को 42815 वोट मिले थे। इस प्रकार से बीजेपी उम्मीदवार की 35,781 वोटों से जीत हुई थी। सपा को बगावत से नुकसान हुआ था। जेबा रिजवान चुनाव से 2 महीने पहले ही सपा में शामिल हुई थीं। उन्हें टिकट की उम्मीद थी। हालांकि पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा।

क्रम संख्यापार्टीप्रत्याशीवोट
1बीजेपीकैलाश नाथ शुक्ला87032
2निर्दलीय जेबा रिजवान चुनाव 51251
3सपाअब्दुल खान 42815

2017 में पहली बार जीती थी बीजेपी

अगर हम 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो तुलसीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज की थी। भाजपा के कैलाशनाथ शुक्ला ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को शिकस्त दी थी। इस चुनाव में भी सपा को बगावत का ही सामना करना पड़ा था। दरअसल सपा और कांग्रेस का गठबंधन था लेकिन इस सीट पर दोनों दलों ने उम्मीदवार उतार दिए थे। बीजेपी के कैलाश नाथ शुक्ला को 62296 वोट मिले थे। तो वहीं कांग्रेस की जेबा रिजवान 43637 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थीं। जबकि सपा के अब्दुल मशहूद खान 36549 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर थे। इस प्रकार से बीजेपी को इस सीट पर 18659 वोटों से जीत मिली थी।

क्रम संख्यापार्टीप्रत्याशीवोट
1बीजेपीकैलाश नाथ शुक्ला62296
2कांग्रेस जेबा रिजवान43637
3सपाअब्दुल मशहूद खान36549

क्या है जातीय समीकरण?

अगर हम तुलसीपुर विधानसभा सीट के जातीय समीकरण की बात करें तो यहां पर ब्राह्मण, राजपूत, मुसलमान और दलित निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस सीट पर करीब 60 हजार ब्राह्मण, 35 हजार राजपूत, 65 हजार मुस्लिम और 25 हजार दलित वोटर हैं।

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