Robertsganj Assembly Seat: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की राबर्ट्सगंज विधानसभा सीट जिले की चार विधानसभा सीटों में शामिल है। यह सीट सामान्य वर्ग के लिए है और राबर्ट्सगंज (अनुसूचित जाति) लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। जिला प्रशासन के अनुसार राबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र का नंबर 401 है। इस विधानसभा क्षेत्र में राबर्ट्सगंज शहर के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाके भी शामिल हैं।

राबर्ट्सगंज सोनभद्र जिले का मुख्यालय भी है और जिले की प्रमुख प्रशासनिक एवं कारोबारी गतिविधियों का केंद्र है। विधानसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा ग्रामीण इलाकों में फैला है। खेती, सिंचाई, पेयजल, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार यहां के प्रमुख स्थानीय मुद्दों में शामिल हैं। राबर्ट्सगंज विकासखंड के गांवों में सड़क और पुलिया की समस्याएं भी सामने आती रही हैं। जुलाई 2026 में मानपुर गांव को जोड़ने वाली शाहगंज राजबहा नहर की जर्जर पुलिया की मरम्मत की मांग ग्रामीणों ने उठाई थी।

पेयजल भी इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण समस्याओं में है। मई 2026 में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण राबर्ट्सगंज नगरीय क्षेत्र के साथ ग्रामीण इलाकों में करीब 200 गांवों में पानी की आपूर्ति प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी। जल जीवन मिशन के रिकॉर्ड में राबर्ट्सगंज ब्लॉक के गांवों से पाइपलाइन और अनियमित जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतें भी दर्ज हैं।

राबर्ट्सगंज क्षेत्र से बेलन नदी भी जुड़ी है। जिले के उत्तरी हिस्से में बेलन और कर्मनाशा जैसी नदियां बहती हैं। बारिश के दौरान बेलन नदी का जलस्तर बढ़ने से राबर्ट्सगंज ब्लॉक के कई तटीय गांव प्रभावित होने की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है।

2022 में फिर भाजपा के भूपेश चौबे जीते

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के भूपेश चौबे ने लगातार दूसरी बार राबर्ट्सगंज सीट पर जीत दर्ज की। उन्हें 84,496 वोट मिले। समाजवादी पार्टी के अविनाश कुशवाहा 78,875 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि बहुजन समाज पार्टी के अविनाश शुक्ला को 32,887 वोट मिले। भूपेश चौबे ने अविनाश कुशवाहा को 5,621 वोटों से हराया।

राबर्ट्सगंज विधानसभा चुनाव परिणाम 2022

उम्मीदवारपार्टीप्राप्त वोट
भूपेश चौबे (विजेता)भाजपा84,496
अविनाश कुशवाहासपा78,875
अविनाश शुक्लाबसपा32,887
जीत का अंतर5,621 वोट

2022 का मुकाबला राबर्ट्सगंज सीट पर काफी करीबी रहा। भाजपा को 40.29 प्रतिशत और सपा को 37.61 प्रतिशत वोट मिले। दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के बीच वोटों का अंतर 6 हजार से भी कम रहा।

2017 में बड़ी जीत के साथ भाजपा ने बदला समीकरण

2017 में भाजपा के भूपेश चौबे ने पहली बार राबर्ट्सगंज विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर राजनीतिक समीकरण बदल दिया था। उन्हें 89,932 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के अविनाश कुशवाहा को 49,394 वोट मिले। बसपा के सुनील कुमार सिंह यादव 39,336 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

भूपेश चौबे ने सपा के अविनाश कुशवाहा को 40,538 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में इस सीट पर 3,25,035 मतदाता थे और 2,03,438 वैध वोट पड़े थे।

राबर्ट्सगंज विधानसभा चुनाव परिणाम 2017

उम्मीदवारपार्टीप्राप्त वोट
भूपेश चौबे (विजेता)भाजपा89,932
अविनाश कुशवाहासपा49,394
सुनील कुमार सिंह यादवबसपा39,336
जीत का अंतर40,538 वोट

2017 से पहले राबर्ट्सगंज सीट पर सपा का प्रभाव रहा था। इसलिए भाजपा की 40 हजार से ज्यादा वोटों की जीत को सीट के राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव माना गया।

2012 में सपा के अविनाश कुशवाहा ने जीती थी सीट

राबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र में 2012 का चुनाव भी महत्वपूर्ण रहा। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के अविनाश कुशवाहा ने जीत दर्ज की थी। उन्हें 47,139 वोट मिले थे। बहुजन समाज पार्टी के रमेश सिंह 41,798 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि भाजपा के जय प्रकाश चतुर्वेदी को 20,143 वोट मिले।

अविनाश कुशवाहा ने बसपा के रमेश सिंह को 5,341 वोटों से हराया था। 2012 में इस सीट पर सपा और बसपा के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा था।

राबर्ट्सगंज विधानसभा चुनाव परिणाम 2012

उम्मीदवारपार्टीप्राप्त वोट
अविनाश कुशवाहा (विजेता)सपा47,139
रमेश सिंहबसपा41,798
जय प्रकाश चतुर्वेदीभाजपा20,143
जीत का अंतर5,341 वोट

ग्रामीण और शहरी मुद्दे चुनाव में रहेंगे अहम

राबर्ट्सगंज विधानसभा सीट की खासियत यह है कि यहां जिला मुख्यालय का शहरी क्षेत्र भी है और बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाके भी। इसलिए चुनावी चर्चा सिर्फ बड़े राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहती। पेयजल, सड़क, पुलिया, जल निकासी, बिजली, खेती, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे सवाल भी मतदाताओं के बीच अहम रहते हैं।

राबर्ट्सगंज शहर में भी जल निकासी और पेयजल की समस्या सामने आती रही है। 2025 में नगर के विस्तारित क्षेत्र की करीब 30 हजार आबादी के पेयजल संकट की रिपोर्ट सामने आई थी। 2025 में ही बारिश के दौरान शहर की कई सड़कें जलमग्न होने की खबर आई थी। वहीं 2026 में नगर के अलग-अलग वार्डों में खराब नालियों और जर्जर सड़कों को लेकर स्थानीय लोगों ने शिकायतें उठाईं।

ग्रामीण इलाकों में भी सड़क और संपर्क मार्ग चुनावी मुद्दा बन सकते हैं। राबर्ट्सगंज विकासखंड के मानपुर गांव को जोड़ने वाली जर्जर पुलिया की मरम्मत की मांग इसका एक ताजा उदाहरण है।

2027 में भाजपा के सामने सीट बचाने की चुनौती

राबर्ट्सगंज में पिछले तीन विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड देखें तो तस्वीर दिलचस्प है। 2012 में सपा के अविनाश कुशवाहा जीते, 2017 और 2022 में भाजपा के भूपेश चौबे ने लगातार दो जीत दर्ज की। यानी पिछले एक दशक में इस सीट का राजनीतिक समीकरण सपा से भाजपा की ओर स्पष्ट रूप से बदला है।

लेकिन 2022 में भाजपा की जीत का अंतर घटकर सिर्फ 5,621 वोट रह गया था। दूसरी ओर, सपा के अविनाश कुशवाहा को 37.61 प्रतिशत वोट मिले थे। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी, जबकि सपा पिछली हार का अंतर घटने को वापसी की संभावना के रूप में देख सकती है।

राबर्ट्सगंज में इस बार मुकाबला सिर्फ भाजपा और सपा के बीच वोटों के गणित का नहीं होगा। **पेयजल, सड़क, पुलिया, बिजली, खेती, रोजगार और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे भी यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि 2027 में राबर्ट्सगंज की राजनीतिक दिशा किस ओर जाती है।

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घोरावल तहसील सोनभद्र की प्रमुख तहसीलों में शामिल है। पूरा इलाका काफी हद तक ग्रामीण है। खेती, पानी, सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार यहां के आम लोगों के लिए बड़े मुद्दे हैं। क्षेत्र में बेलन नदी भी महत्वपूर्ण है। गर्मियों में पानी का संकट और भूजल पर बढ़ती निर्भरता इस इलाके की पुरानी चिंता रही है। घोरावल क्षेत्र के कई गांवों में भूजल संकट की रिपोर्ट भी सामने आती रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक