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काशी में तालाब की गंदगी से ‘राम’, ‘लक्ष्मण’ को आने लगीं उल्टियां, रामलीला छोड़ धरने पर बैठे

रामलीला का मंचन थोड़ा और बेहतर तरीके से दिखाने के लिए पूरी मंडली धनेसरा तालाब पहुंची थी। तालाब उस वक्त कूड़े-कचरे से अटा पड़ा था।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एक्सप्रेस फोटोः ताशी तोबग्याल)

उत्तर प्रदेश के काशी में एक जगह रामलीला के दौरान राम-लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले मंचन छोड़कर धरने पर बैठ गए। वजह- नजदीक में भीषण गंदा तालाब था, जिसकी दुर्गंध से उनकी तबीयत खराब हो गई। राम-लक्ष्मण को उस दौरान उल्टियां आने लगी थीं। शनिवार (छह अक्टूबर) रात धनेसरा तालाब के पास राम-केवट संवाद देखने जुटी भीड़ भी उन्हें धरने पर बैठा देख हैरान रह गई। राम-लक्ष्मण के साथ उस वक्त रामलीला के अन्य पात्र भी कॉस्ट्यूम में मौजूद थे।

‘टीओआई’ की रिपोर्ट में आयोजकों के हवाले से बताया गया कि यहां 16वीं सदी से लाट भैरव रामलीला हो रही है। आमतौर पर यह अधमपुरा के लाट भैरव मंदिर में होती है। दो चीजों- केवट संवाद और जिसमें केवट राम, लक्ष्मण और सीता को गंगा के पार लेकर जाते हैं, के मंचन को थोड़ा और बेहतर तरीके से दिखाने के लिए पूरी मंडली धनेसरा तालाब पहुंची थी। मगर तालाब उस वक्त कूड़े-कचरे से अटा पड़ा था। गंदगी का आलम कुछ यूं था कि दोनों मुख्य किरदारों को उल्टियां आने लगीं, लिहाजा वे सब कुछ छोड़छाड़ कर धरने पर बैठ गए। दो घंटों तक मनाने-समझाने के बाद रामलीला शुरू हुई।

राम-लक्ष्मण के धरने की जानकारी पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष राम अवतार पांडे मौके पर पहुंचे।  फिर एडीएम सिटी विनय कुमार सिंह और एएमसी एके सिंह भी वहां धरना खत्म कराने पहुंचे। तालाब व रामलीला मैदान की ढंग से साफ-सफाई के आश्वासन पर राम और लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले माने, जिसके बाद राम-केवट संवाद का मंचन हो सका।

पांडे ने अंग्रेजी अखबार को बताया कि 1545 से यहां रामलीला होती आ रही है, पर पूर्व में कभी ऐसी समस्या नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि तालाब के नजदीक ही रहने वाले कुछ लोग जानबूझ कर उसमें कूड़ा-कचरा फेंकते हैं, ताकि रामलीला का मंचन न हो सके। उनके मुताबिक, त्यौहारों पर भी यहां साफ-सफाई के लिए कोई पहल नहीं की जाती है। वहीं, डीएम सुरेंद्र सिंह का कहना है कि तालाब के पास से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चालू कर दी गई है।

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