RSS प्रमुख मोहन भागवत बीते दिनों लखनऊ में थे। यहां उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से दो अलग- अलग बैठकें की। इन्हीं बैठकों के बाद से कयासों का बाजार गरम है। RSS सूत्रों ने बताया कि बुधवार शाम सीएम योगी ने निराला नगर स्थित शिशु मंदिर में मोहन भागवत से शिष्टाचार भेंट की। यह वन-ऑन-वन मीटिंग थी, जो करीब तीस मिनट चली।
इस मीटिंग के आधिकारिक एजेंडे को लेकर RSS या सीएम ऑफिस की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई है लेकिन संघ के एक पदाधिकारी ेने कहा कि यह शिष्टाचार भेंट थी। सरसंघचालक से मिलने के लिए बहुत सारे मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने समय मांगा था। उनके दौरों के दौरान ऐसी मीटिंग होती हैं। ऐसी बैठकों में कोई सियासी फैसले नहीं लिए जाते, सिर्फ चर्चा होती है।
मीटिंग के एजेंडे के बारे में बीजेपी के एक नेता ने कहा कि विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक साल बचा है, ऐसे में राज्य के सामाजिक और सियासी हालातों पर चर्चा जरूर हुई होगी। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार और बीजेपी संगठन दोनों ही चुनावी मोड में आ गए हैं। राज्य में कैबिनेट फेरबदल की भी उम्मीद है।
अगले दिन संघ प्रमुख से मिले केशव प्रसाद
योगी से मुलाकात के कुछ घंटों बाद गुरुवार सुबह राज्य के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी उसी जगह पहुंचकर संघ प्रमुख से मुलाकात की। यह मीटिंग भी करीब तीस मिनट चली। इस मीटिंग पर इसलिए सभी का ध्यान गया क्योंकि यह सीएम योगी के साथ हुई संघ प्रमुख की मीटिंग से अलग थी।
यह दोनों बैठकें इसलिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती हैं क्योंकि इन दोनों ही नेताओं के बीच लगातार अनबन की खबरें आ रही हैं। केशव प्रसाद मौर्य RSS, VHP के जरिए बीजेपी में पहुंचे हैं। वह 2017 चुनाव जीत के बाद सीएम पद की रेस में सबसे आगे माने जा रहे थे लेकिन बाजी योगी आदित्यनाथ ने मार ली।
इसके बाद साल 2022 में केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा, जिसके लिए उनके समर्थकों ने ‘अंदरूनी तोड़-फोड़’ और योगी के साथ उनके रिश्तों को दोषी ठहराया। इस विधानसभा चुनाव के बाद भी केशव प्रसाद मौर्य डिप्टी सीएम बनाए गए, जिसे बीजेपी आलाकमान की तरफ से शांति बनाए रखने के प्रयासों के रूप में देखा गया।
जब योगी पर तंज की तरह देखा गया केशव का बयान
इसके बाद साल 2024 लोकसभा चुनाव के बाद जब योगी प्रदेश में बीजेपी के खराब प्रदर्शन की वजह से आलोचना झेल रहे थे, तब केशव प्रसाद मौर्य का पार्टी की वर्किंग कमेटी में दिया गया बयान – ‘संगठन सरकार से बड़ा है’ – सीधे तौर पर सीएम पर अटैक माना गया। इस बयान का यह मतलब निकाला गया कि मुख्यमंत्री पार्टी कार्यकर्ताओं को इग्नोर कर अधिकारियों के जरिए राज्य चला रहे हैं।
पिछले साल अक्टूबर महीने में जब यूपी सरकार के तमाम बड़े नेता अयोध्या में दीपोत्सव मनाने के लिए जुटे थे, तब भी केशव प्रसाद मौर्य की गैर-मौजूदगी ने इन दोनों नेताओं के बीच ‘दरारों’ का इशारा किया था। केशव प्रसाद मौर्य के करीबी लोगों ने कहा था कि बिहार चुनाव में अपने बिजी शेड्यूल की वजह से उन्हें आखिरी मिनट में अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
हालांकि तब बीजेपी नेताओं ने एडमिनिस्ट्रेटिव गड़बड़ी को दोषी ठहराया था। बीजेपी के कुछ अन्य लोगों ने तब कहा कि केशव इसलिए नहीं आए क्योंकि विज्ञापनों में उनके नाम का कोई जिक्र नहीं था और उन्हें कार्यक्रम की डिटेल्स नहीं दी गईं। इसमें यह भी शामिल था कि केशव प्रसाद मौर्य कहां बैठेंगे।
ब्रजेश पाठक से भी मिले संघ प्रमुख
गुरुवार को ही संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से भी अलग मुलाकात की। इसे भी सूत्रों ने शिष्टाचार भेंट कहा।
ब्राह्मणों को रिझाने में जुटे ब्रजेश पाठक
गुरुवार सुबह यूपी के दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर 101 ‘बटुकों’ का स्वागत किया। ब्रजेश पाठक ने अपने परिवार के साथ इन ब्राह्मणों के माथे पर तिलक लगाया और फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि ‘बटुकों का सम्मान, हमारा सौभाग्य’। इसी पोस्ट में उन्होंने यह भी लिखा, ‘सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक, सुसंस्कृत राष्ट्र के आधार स्तंभ, बटुक ब्राह्मणों का हार्दिक अभिनन्दन!’
एक सूत्र ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि आमतौर पर ब्रजेश पाठक के घर पर अपनी समस्याओं के निदान के लिए हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं। गुरुवार को बटुक आए और डिप्टी सीएम ने उनका स्वागत किया।
बटुकों का स्वागत कर क्या मैसेज देने की कोशिश?
हाल ही में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और योगी सरकार के बीच तनाव पूरे देश ने देखा। जनवरी में प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद दिनों तक प्रदर्शन किया था क्योंकि स्थानीय प्रशासन ने उन्हें मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम में कथित तौर पर डुबकी लगाने से रोक दिया था। इसके बाद से योगी सरकार पर ‘सनातन का अपमान’ करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
तब खुद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सुलह की कोशिशें की थीं। अब क्योंकि विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं और कांग्रेस व बसपा भी ब्राह्मणों के करीब जाने के प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में ब्रजेश पाठक द्वारा बटुकों के स्वागत को भी ऐसी ही कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
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यूपी में वक्त-वक्त पर संगठन और सरकार के भीतर ही कई तरह के सवाल उठते रहे हैं। कभी बीजेपी के विधायक, सांसद यहां तक की मंत्री को भी अपनी बात मनवाने के लिए धरने पर बैठना पड़ा तो कभी वर्तमान सांसद और पूर्व बीजेपी सांसद का विवाद भी सुर्खियों में रहा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
