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उत्तर प्रदेशः महाविद्यालयों में होगा पुलिस-छात्र संवाद

जहां पुलिस एक पब्लिक ऑफिसर के रूप में महाविद्यालयों में महीने में एक बार युवाओं को आज के समय में बढ़ रहे ऐसे अपराधों एवं उनके करने पर भारतीय दंड संहिता के तहत मिलने वाले सजा समेत अन्य प्रावधानों से अवगत कराएगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर,फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने में लचर कानून व्यवस्था से ज्यादा इनसे बचने के लिए पूर्व प्रयासों में कमी है। ऐसी घटनाओं में वृद्धि इस बात को इंगित करती है युवाओं को भारतीय दंड संहिता में महिलाओं के प्रति इन जघन्य अपराधों के कारण मिलने वाली सजा से अवगत कराया जाए। इस मुहिम को शुरू करने की पहल उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने की है। जहां पुलिस एक पब्लिक ऑफिसर के रूप में महाविद्यालयों में महीने में एक बार युवाओं को आज के समय में बढ़ रहे ऐसे अपराधों एवं उनके करने पर भारतीय दंड संहिता के तहत मिलने वाले सजा समेत अन्य प्रावधानों से अवगत कराएगी।

इस मुहिम को प्रभावी बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने पुलिस महानिरीक्षक मेरठ व सहारनपुर मंडल को पत्र भेजकर महीने में कम से कम एक बार महाविद्यालयों में इन अपराधों के मूल कारण मानसिक विकृति को दूर करने के लिए जागरूक करने के लिए कहा है। छात्र जागरूक होकर समाज को भी जागरूक करने में मदद करेंगे। इससे महिलाओं के प्रति होने वाले जघन्य अपराधों में काफी कमी आ सकेगी। पुलिस महानिरीक्षक के अलावा मेरठ व सहारनपुर मंडल के उच्च शिक्षा विभाग ने इस अनूठी पहल के बारे में अपर मुख्य सचिव गृह उत्तर प्रदेश शासन और शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा प्रयागराज को भी अवगत कराया है।

शिक्षाविदें का मानना है कि पुलिस व्यवस्था का स्वरूप समाज में अपराध होने के उपरांत मात्र दोषी को दंडित करने का नहीं, बल्कि नागरिक अव्यवस्था फैलने से बचाने के लिए भी है। मौजूदा व्यवस्था में अपराधों से बचने के लिए पूर्व प्रयास ना के बराबर हैं। अपराध घटित होने के बाद केवल कानूनी जांच एवं आपराधिक आपातकाल के लिए कानून का लागू करना ऐसी मानसिक विकृतियों का समाधान नहीं है। नागरिक अव्यवस्था को बचाने के लिए जरूरी है कि युवाओं को महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों को ना करने और अपराध करने पर मिलने वाली समाज के बारे में जरूर बताया जाए।

उत्तर प्रदेश के दोनों मंडलों में मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, हापुड़, बागपत और गौतमबुद्धनगर के नौ जिले हैं। जिनके 18 सरकारी, 50 अशासकीय अनुदानित और 1002 स्व वित्त पोषित महाविद्यलयों में करीब साढ़े तीन लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि इस मुहिम से महिलाओं के प्रति होने वाले जघन्य अपराधों में शून्यता आ सकती है। मानसिक विकृति को दूर कर समाज में सकारात्मक प्रभाव डालने में यह कदम काफी प्रभावी साबित होगा।

पुलिस कुछ नहीं कर रही, यह सही नहीं हैे लेकिन जघन्य अपराध होने के उपरांत मिलने वाले पीड़ादायक दंड की जानकारी होने से निश्चित सुधार आएगा। इससे महिलाओं समेत अन्य तरह के अपराधों में कमी आएगी। साथ ही यह मुहिम छात्रों के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होगी।
–विमला बाथम, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश महिला आयोग

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