Mirzapur Assembly Seat: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में काशी और प्रयागराज के बीच विंध्य पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा मिर्जापुर जिला धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से खास महत्व रखता है। मां विंध्यवासिनी धाम के कारण इसे विंध्यधाम के नाम से भी जाना जाता है। आजादी के आंदोलन से लेकर प्रदेश की राजनीति तक, मिर्जापुर ने कई बड़े नेताओं को जन्म दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी, पूर्व सांसद फूलन देवी, बालकुमार पटेल और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री एवं अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल जैसे नेताओं ने इस जिले को राष्ट्रीय राजनीति में अलग पहचान दिलाई है।
मिर्जापुर जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं – मिर्जापुर नगर, मझवां, चुनार, मड़िहान और छानबे (आरक्षित)। इनमें मिर्जापुर नगर विधानसभा सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। पूर्वांचल की राजनीति का रुख समझने के लिए इस सीट के चुनाव परिणामों पर हमेशा विशेष नजर रहती है।
राजनाथ सिंह से जुड़ा है इस सीट का इतिहास
मिर्जापुर नगर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास काफी रोचक रहा है। वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर राजनाथ सिंह ने इसी सीट से विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक यात्रा को नई दिशा दी थी। आगे चलकर वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री बने।
इसी सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी के पौत्र ललितेश पति त्रिपाठी और राजेश पति त्रिपाठी ने भी चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।
एक दशक तक सपा का रहा दबदबा
वर्ष 2002 से 2012 तक मिर्जापुर नगर विधानसभा समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ रही। सपा के कैलाश नाथ चौरसिया ने लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतकर इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। उस समय यह सीट समाजवादी पार्टी की सबसे सुरक्षित सीटों में गिनी जाती थी।
2017 में भाजपा ने बदली सियासी तस्वीर
2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेशभर में चली भाजपा की लहर का असर मिर्जापुर नगर विधानसभा पर भी दिखाई दिया। भाजपा उम्मीदवार रत्नाकर मिश्रा ने सपा के तीन बार के विधायक कैलाश नाथ चौरसिया को 57,412 वोटों के बड़े अंतर से हराकर सीट भाजपा की झोली में डाल दी। यह जीत मिर्जापुर की राजनीति में बड़ा बदलाव मानी गई।
मिर्जापुर नगर विधानसभा चुनाव परिणाम 2017
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|---|
| रत्नाकर मिश्रा (विजेता) | भाजपा | 1,09,196 |
| कैलाश नाथ चौरसिया | समाजवादी पार्टी | 51,784 |
जीत का अंतर: 57,412 वोट
2022 में भाजपा ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की
2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने अपना दबदबा बरकरार रखा। रत्नाकर मिश्रा ने एक बार फिर सपा के कैलाश नाथ चौरसिया को 39,876 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। इसके साथ ही भाजपा ने इस सीट पर अपना मजबूत राजनीतिक आधार स्थापित कर लिया।
मिर्जापुर नगर विधानसभा चुनाव परिणाम 2022
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|---|
| रत्नाकर मिश्रा (विजेता) | भाजपा | 1,18,642 |
| कैलाश नाथ चौरसिया | समाजवादी पार्टी | 78,766 |
जीत का अंतर: 39,876 वोट
2012 में लगातार तीसरी बार जीते थे कैलाश नाथ चौरसिया
2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के कैलाश नाथ चौरसिया ने बहुजन समाज पार्टी के रंगनाथ मिश्रा को 22,299 वोटों से हराकर लगातार तीसरी बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी। यही चुनाव इस सीट पर सपा के लंबे वर्चस्व का अंतिम चुनाव भी साबित हुआ।
मिर्जापुर नगर विधानसभा चुनाव परिणाम 2012
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|---|
| कैलाश नाथ चौरसिया (विजेता) | समाजवादी पार्टी | 69,099 |
| रंगनाथ मिश्रा | बहुजन समाज पार्टी | 46,800 |
जीत का अंतर: 22,299 वोट
2027 में फिर रहेगी सबकी नजर
मिर्जापुर नगर विधानसभा आज पूर्वांचल की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में शामिल है। कभी समाजवादी पार्टी का अभेद्य गढ़ रही यह सीट पिछले दो विधानसभा चुनावों से भाजपा के कब्जे में है। ऐसे में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपनी जीत की हैट्रिक लगा पाती है या समाजवादी पार्टी इस सीट पर वापसी कर अपने पुराने जनाधार को फिर से मजबूत करती है। पूर्वांचल की राजनीति में इस सीट का महत्व हमेशा बना रहा है और आने वाले चुनाव में भी यह सबसे चर्चित विधानसभा क्षेत्रों में शामिल रहने की पूरी संभावना है।
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अंग्रेजों ने भारत में व्यापार करने के लिए कलकत्ता में प्रवेश किया। धीरे-धीरे अपने पांव फैलाते-फैलाते उत्तर भारत की ओर बढ़ने लगे। लेकिन अंग्रेजों को समझ नहीं आ रहा था कि वो उत्तर भारत के साथ ही मध्य भारत में व्यापार का केंद्र कहाँ बनाया जाए। इसके लिए कंपनी के अंग्रेज अफसरों ने गंगा के रास्ते में पड़ने वाले लगभग सभी नगरीय क्षेत्रों का अध्ययन करना शुरू किया। 17वीं शताब्दी में लार्ड मर्क्यूरियस वेलेस्ले नाम के एक अंग्रेज अधिकारी ने एक गंगा नदी के किनारे एक नगरीय स्थान का चयन किया। जिसको बाद में मिर्जापुर के नाम से जाना गया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
