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मणिकर्णिका घाट पर बाढ़, अंतिम संस्‍कार को लगी लाशों की कतार

किसी के अंतिम संस्कार में चोलापुर से आए नवीन बोले, "यहां पर किसी प्रकार का बंदोबस्त नहीं है। धर्मशाला भी बंद है, लिहाजा हम लकड़ियों की गठरियों पर बैठने पर मजबूर हैं।"

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के घाटों के आस-पास बाढ़ जैसे हालात हो गए। गुरुवार (छह सितंबर) दोपहर को मणिकर्णिका घाट (मुख्य श्मशान घाट) पर इसी कारण अंतिम संस्कार के लिए लाशों की कतार लग गई। बारी आने के लिए मृतकों के परिजन को यहां तीन से पांच घंटों के बीच तक का इंतजार करना पड़ा। घाट पर लबालब पानी भरा होने के चलते इसके ऊपर वाले घाट पर दाह संस्कार किए गए।

घाट के पास चिता के लिए लकड़ी बेचने वाले दुकानदार संतोष कुमार ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि मणिकर्णिका पर एक समय में आमतौर पर करीब 20 चिताएं जलती हैं। पर घाट पर बाढ़ जैसे हालात से ऊपर वाले घाट पर 10 ही लाशें एक वक्त में जलाई जा रही हैं।

घाट के पास बने एक धर्मशाला में बीते दिनों कुछ काम हुआ था। यह मुख्य रूप से अंतिम संस्कार में आए लोगों के ठहरने के लिए है, पर गुरुवार को यहां ताला लटका मिला। किसी के अंतिम संस्कार में चोलापुर से आए नवीन बोले, “यहां पर किसी प्रकार का बंदोबस्त नहीं है। धर्मशाला भी बंद है, लिहाजा हम लकड़ियों की गठरियों पर बैठने पर मजबूर हैं।”

उधर, हरिश्चंद्र घाट पर भी पानी भर गया है। यहां भी ऊपर चिताएं रखकर जलाई जा रही हैं। गंगा में आए उफान के कारण शीतला मंदिर के पट भी इस दौरान बंद कर दिए गए, जबकि आरती दूसरे मंदिर में की गई। वहीं, गंगा आरती ‘गंगा सेवा निधि’ की छत पर हो रही है। अस्सी घाट पर ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच भी पूरी तरह से गंगा के पानी से डूब गया।

श्मशान घाट पर इन सारी व्यवस्थाएं का जिम्मा वाराणसी नगर निगम के अंतर्गत आता है। एडिश्नल म्युनिसिपल कमिश्नर अजय कुमार सिंह से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस विषय में जांच कराने की बात कही।

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