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‘विकास दुबे और लल्लन वाजपेयी, एक ही सिक्के के दो पहलू’, दोनों बराबर बांटते थे उगाही, मृतक संतोष शुक्ला के भाई ने सुनाई तीन दशक की कहानी

मनोज शुक्ला ने बताया कि "2001 में उनके भाई की हत्या के दौरान पुलिस ने जो भूमिका निभायी थी, उसका दुष्परिणाम अब सामने आया है।

Vikas Dubey, Kanpur,कानपुर एनकाउंटर का मुख्य आरोपी विकास दुबे की पुलिस तलाश कर रही है। (फोटो-Twitter)

कानपुर मुठभेड़ में 8 पुलिसकर्मियों की शहादत का जिम्मेदार विकास दुबे फिलहाल फरार है और उसकी तलाश में पुलिस जगह जगह छापेमारी कर रही है। वहीं अब विकास दुबे को लेकर नए नए खुलासे हो रहे हैं। भाजपा नेता संतोष शुक्ला की पुलिस थाने में हत्या का आरोप विकास दुबे पर लगा था। अब उनके भाई मनोज शुक्ला ने विकास दुबे के बीते तीन दशक की कहानी बतायी है कि कैसे विकास दुबे और लल्लन वाजपेयी उगाही का काम करते थे किस तरह से उसने राजनीति और प्रशासन में अपनी पकड़ बनायी हुई थी।

द क्विंट के साथ बातचीत में मनोज शुक्ला ने बताया कि “2001 में उनके भाई की हत्या के दौरान पुलिस ने जो भूमिका निभायी थी, उसका दुष्परिणाम अब सामने आया है। मनोज शुक्ला ने आरोप लगाया कि अपराधी पुलिस को पैसा देते हैं। प्रशासन की लचर व्यवस्था जिसका सबसे कमजोर पक्ष पैसा है, उसी का परिणाम है कि आज अपराधी ने पुलिस को निशाना बनाया है।”

मनोज शुक्ला ने बताया कि “विकास दुबे और लल्लन वाजपेयी एक ही सिक्के के दो पहलू थे। ये दोनों मिलकर दुकानदारों से उगाही करते थे। लेकिन लल्लन वाजपेयी 1995 में पंचायत चेयरमैन बन गया। ऐसे में लल्लन वाजपेयी ने उगाही बंद करने का फैसला किया लेकिन विकास दुबे ने उगाही जारी रखी। यही वजह रही कि दोनों के बीच विवाद हो गया। जिससे दोनों के बीच दुश्मनी हो गई।”

शुक्ला के अनुसार, “12 अक्टूबर 2001 को विकास दुबे और उसके हथियारबंद आदमियों ने लल्लन वाजपेयी के घर को घेर लिया। इस पर लल्लन वाजपेयी ने घबराकर भइया संतोष शुक्ला को फोन किया कि उसकी हत्या की जा सकती है। इस पर संतोष शुक्ला शिवली थाने में पहुंचे। मनोज शुक्ला का कहना है कि जब यह बात विकास दुबे को पता चली तो वह लल्लन वाजपेयी को छोड़कर शिवली थाने पहुंचा और वहां भइया की हत्या कर दी।”

मनोज शुक्ला ने बताया कि “2005 में उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज करायी लेकिन सभी गवाह पुलिसकर्मी मुकर गए। जिसके चलते विकास दुबे रिहा हो गया। राजनीति और अपराध के गठजोड़ पर मनोज शुक्ला ने कहा कि नेताओं को बाहुबलियों को संरक्षण देने में खुशी होती है।”

शुक्ला के अनुसार, “बसपा की सरकार में और फिर सपा की सरकार में भी ऐसे ही नेताओं ने अपराधियों को संरक्षण दिया। 2017 में कई पूर्व विधायक भाजपा में शामिल हुए और इस तरह भाजपा की सरकार में भी उसे संरक्षण मिलता रहा।”

वहीं दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में लल्लन वाजपेयी ने बताया कि विकास दुबे ने 17 साल की उम्र में पहली हत्या की थी। वाजपेयी ने ये भी बताया कि सहारनपुर में एक मामले में विकास पर हमला हुआ था। इसके बाद उसके पैर में रॉड पड़ी हुई है, जिसकी वजह से वह 500 कदम भी नहीं चल सकता। लल्लन वाजपेयी ने ये भी बताया कि पहली हत्या के बाद वह छोटी-मोटी चोरियां और लूटपाट करने लगा। साल 1991 में उसने अपने गांव में ही एक व्यक्ति की जमीन कब्जाने के लिए उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद रामबाबू हत्याकांड, सिद्धेश्वर पांडेय हत्याकांड और फिर राज्यमंत्री संतोष शुक्ला हत्याकांड के साथ ही विकास दुबे के अपराध का ग्राफ ऊंचा ही चढ़ता चला गया।

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