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‘Operation Durachari’ से पहले Anti-Romeo Squad लाई थी योगी सरकार, फिर भी महिलाओं के खिलाफ क्राइम में टॉप पर था UP!

एन्टी रोमियों स्क्वाड या सीधे एनकाउंटर जैसी नीतियों के बाद भी उत्तरप्रेदश महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में देश में निरंतर टॉप पर बना हुआ है।

yogi adityanath uttar pradesh operation durachariउत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल फोटो)

उत्तरप्रेदश की योगी सरकार इस बार महिला सुरक्षा के लिए बिल्कुल अलग तरह की रणनीति लेकर आयी है। इसी रणनीति का नाम ‘आपरेशन दुराचारी’ है। जिसके तहत महिलाओं और लड़कियों में सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार उनके साथ छेड़खानी, यौन उत्पीड़न तथा ऐसे ही अन्य अपराधों में शामिल लोगों के पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगवा ऐसे अपराधियों को बेइज्जत करेगी।

बता दें कि पिछले कुछ महीनों से राज्य में महिला केंद्रित अपराध तीव्र गति से बड़े हैं। यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ , गैंगरेप , हत्या आदि की कई घटनाएं सामने आयी हैं। माना जा रहा है कि लगातार बढ़ते अपराध से सरकार पर जन दवाब बढ़ रहा था। इसीलिए सरकार इस नई नीति के साथ आयी है। उल्लेखनीय है कि योगी सरकार ने इससे पहले भी सरकार बनते ही महिला सम्बंधित अपराध रोकने के लिए ‘एन्टी-रोमियो स्क्वाड’ का गठन किया था। यह एंटी रोमियो स्क्वाड काफी विवादित रही था। एन्टी-रोमियो स्क्वाड की कार्रवाइयों को लेकर कई बार आलोचना हुई थी।

एन्टी रोमियों स्क्वाड या सीधे एनकाउंटर जैसी नीतियों के बाद भी उत्तरप्रेदश महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में देश में निरंतर टॉप पर बना हुआ है। साल 2018 में देश मे महिलाओं के खिलाफ होने वाले कुल अपराध में उत्तरप्रेदश की हिस्सेदारी 16% की थी। जो देशभर में सबसे अधिक थी।

एनसीआरबी (NCRB) के 2018 के आंकड़ों के अनुसार देश में महिलाओं के खिलाफ कुल 3 लाख 78 हज़ार 227 मामले दर्ज हुए थे । जिनमें से सिर्फ उत्तरप्रेदश में 59 हज़ार 445 मामले दर्ज हुए। वही 2017 में कुल 56 हज़ार 011 मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2017 और 2018 में अपराधों के मामले में लगातार उत्तर प्रदेश देश मे प्रथम स्थान पर रहा था।

आरोपियों के पोस्टर लगवाने वाली नीति सरकार ने नागरिकता कानून का विरोध करने वालों के विरुद्ध भी अपनायी थी। जिसे हाई कोर्ट ने गैर कानूनी करार देकर, रोकने को कहा था और सारे पोस्टर हटाने का निर्णय दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो सरकार के इस कदम को आधार दे सके।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की मुख्य वजहों में से एक वजह कानूनी प्रकिया का धीमा होना भी माना जाता है। एनसीआरबी (NCRB) 2018 के आँकड़ें बताते हैं कि देशभर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले कुल बलात्कार के मामलों में सिर्फ 11 % का ही निबटारा (निस्तारण) हुआ है। जो कि बेहद निम्न दर है। और सिर्फ 27% मामलों में दोषी साबित हो पाए हैं। यह आकंड़े बताते हैं कि किस तरह पुलिस, महिला केंद्रित मामलों का न्यायालय में मजबूती से पक्ष नहीं रख पाती है।

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