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किसान आंदोलनः झुकी यूपी सरकार, वापस लिया किसानों का 10 लाख के बॉन्ड वाला नोटिस

इसी मामले में 25 जनवरी को सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रशासन से पूछा कि आखिर किन परिस्थितियों की वजह से किसानों से निजी बॉन्ड की इतनी बड़ी रकम मांगी गई।

tractor rally, farmer protest, delhi violenceदिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन हुई ट्रैक्टर रैली में यूपी से भी गए थे किसान (फोटो सोर्सः एजेंसी)

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया है कि उसने 162 किसानों के लिए तैयार किए गए ‘शांति के उल्लंघन’ से जुड़े नोटिस रोक दिए हैं। दरअसल, सीतापुर में प्रशासन ने किसान आंदोलन के मद्देनजर किसी भी तरह के कानून उल्लंघन को रोकने के लिए ट्रैक्टर रखने वाले किसानों से 50 हजार रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक के निजी बॉन्ड भरने की मांग रख दी थी। इनमें से ज्यादातर नोटिस 19 जनवरी को ही भेज दिए गए थे।

पिछले हफ्ते ही इस मामले में पीआईएल दायर होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अफसरों से जवाब मांगा था। पीआईएल में किसानों की तरफ से एक्टिविस्ट अरुंधति धुरु ने कहा था कि सीतापुर जिला प्रशासन ने 19 जनवरी को ट्रैक्टर रखने वाले सभी किसानों को नोटिस जारी किया और पुलिस ने उनके घर का घेराव कर लिया, ताकि किसानों को आंदोलन में भाग लेने से रोका जा सके। इसी मामले में 25 जनवरी को सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रशासन से पूछा कि आखिर किन परिस्थितियों की वजह से किसानों से निजी बॉन्ड की इतनी बड़ी रकम मांगी गई।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में 2 फरवरी को सुनवाई की और अपने फाइनल ऑर्डर में कोर्ट ने कहा, “हमें यूपी सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल वीके शाही की तरफ से जानकारी मिली है कि 162 किसानों को एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए 10 लाख रुपए का बॉन्ड और दो जमानत भरवाने के जो नोटिस जारी किए गए थे, उन्हें ताजा रिपोर्ट आने के बाद वापस लिया जा रहा है।” पहले प्रशासन ने किसानों को नोटिस जारी कर कहा था कि उन्हें एक साल तक शांति रखने के लिए 10 लाख रुपए का बॉन्ड और दो जमानत क्यों न भरवाई जाएं।

कोर्ट ने आगे बताया कि वीके शाही ने जजों को भरोसा दिया है कि वे सीतापुर के डीएम को आगे इस तरह की कार्यवाही शुरू करने के मामले में सावधान रहने के लिए भी कहेंगे, ताकि किसी भी व्यक्ति का बेवजह उत्पीड़न न हो और उनके अंतर्गत काम करने वालों को भी चेतावनी मिले। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि सीतापुर के डीएम और उनके अंतर्गत काम करने वाले एसडीएम अगली बार किसी व्यक्ति से निजी बॉन्ड और मुचलके भरवाने के आदेश जारी करने में सावधान रहेंगे।”

किसानों को नोटिस जारी करने को न्यायसंगत बता चुके थे एसडीएम: गौरतलब है कि इस मामले में महोली के एसडीएम पंकज राठौड़ ने बताया कि उनकी यह कार्यवाही न्यायसंगत थी, क्योंकि अगर वे यह कदम न उठाते तो सीतापुर में भी वही हालात होते जो दिल्ली में हुए थे। उन्होंने कहा था कि सतनापुर गांव में कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर आंतरिक टकराव है। इसकी वजह से वहां तनाव की स्थिति है और ऐसे में लोग कभी भी शांति व्यवस्था भंग कर सकते हैं। इसी को दिमाग में रखते हुए प्रशासन ने दोनों पक्षों को बॉन्ड के जरिए बांधे रखने का फैसला किया।

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