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गोरखपुर: स्‍कूली छात्रों को बाबा गोरखनाथ और दीनदयाल उपाध्‍याय की दी जाएगी शिक्षा, टीचर बोले- अच्‍छी पहल

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के गढ़ गोरखपुर में छठवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों को बाबा गोरखनाथ, पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय और श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन के बारे में पढ़ाया जाएगा। शिक्षकों ने इसमें जल्‍द ही नए पाठ जोड़ने की भी बात कही है।

गोरखपुर के एक स्‍कूल में पढ़ती छात्राएं।

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के गढ़ गोरखपुर में स्‍कूली छात्रों को ऐसी विभूतियों के बारे में शिक्षा दी जा रही है, जिनके बारे में उन्‍होंने सुना तो होगा, लेकिन ज्‍यादा पढ़ा नहीं होगा। जी हां! गोरखपुर में छठवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों को जल्‍द ही बाबा गोरखनाथ के साथ ही जन संघ के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय और श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में पढ़ाया जाएगा। शिक्षकों ने इसे बेहतरीन पहल करार दिया है। उन्‍होंने बताया कि छात्रों में इनके जीवन के बारे में जानने की उत्‍सुकता है। स्‍कूली छात्र खासकर बाबा गोरखनाथ के जीवन के बारे में जानने के प्रति ज्‍यादा रुचि दिखा रहे हैं। शिक्षकों ने जल्‍द ही नए पाठ जोड़ने की भी बात कही है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की सरकार ने पिछले साल ही नौवीं कक्षा की किताबों में दीनदयाल उपाध्‍याय को लेकर एक नया अध्‍याय जोड़ने की बात कही थी। माध्‍यमिक शिक्षा परिषद ने इस पर विचार-विमर्श भी किया था। दीनदयाल उपाध्‍याय के ‘एकात्‍म मानववाद’ के सिद्धांत को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर चर्चा हुई थी। उस वक्‍त विपक्षी दलों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उस वक्‍त दीनदयाल उपाध्याय सेवा प्रतिष्ठान से ‘एकात्म मानववाद’ पर सामग्री मंगाई गई थी। प्रतिष्‍ठान के प्रमुख अरुण मिश्रा ने कहा था कि उन्‍होंने एकात्म मानववाद पर माध्यमिक शिक्षा परिषद को सामग्री मुहैया करा दी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया था कि स्कूली किताब में शामिल करने के लिए सामग्री के अंतिम चयन के लिए विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों की एक समिति बनायी गई है।

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बीजेपी ने पिछले साल पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी मनाने का फैसला किया था। इसके तहत राज्‍य के स्कूलों में दीनदयाल पर आधारित एक किताब के जरिये सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता कराए जाने की योजना तैयार की गई थी। इस किताब को लेकर ही विवाद हो गया था। विपक्षी दलों को यह किताब रास नहीं आई थी। दरअसल, इस किताब में देश के महापुरुषों के बारे में बताने वाले अध्याय में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसी महान विभूतियों के नाम को शामिल नहीं किया गया था। हालांकि, इसमें डॉक्‍टर भीमराव अंबेडकर और वल्लभ भाई पटेल को जगह दी गई थी। वहीं, किताब में भारत के पहले राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, उपप्रधानमंत्री का तो जिक्र है, लेकिन पहले प्रधानमंत्री के बारे में पूछा तक नहीं गया था।

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