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गर्मी का कहर: काशी के श्मशान घाट पर लग रही लाशों की कतार, अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार

गर्मी और लू की चपेट में आकर मौत का आंकड़ा बढ़ने के चलते मणिकर्णिका घाट पर शवों के आने का सिलसिला बढ़ गया है। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए मृतकों के परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

काशी का मणिकर्णिका श्मशान घाट फोटो सोर्स- @0oYiTsdlKJHXLJD/ट्विटर

देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का कहर अभी जारी है। जिसके चलते गर्मी से मरने वालों का आकंड़ा भी बढ़ा है। ऐसे में काशी के श्‍मशान घाटों पर शवों की लंबी कतार देखी जा सकती है। मणिकर्णिका घाट पर शवों के दाह संस्कार के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि यहां प्रतिदिन 300 से 400 शव आ रहे हैं, लेकिन दाह संस्‍कार के लिये पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि मणिकर्णिका श्मशान घाट के बारे में मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार होने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गर्मी की वजह से बढ़ी लाशों की संख्या: मणिकर्णिका घाट पर बने बाबा महाश्‍मशान नाथ मंदिर के कर्मचारी गुलशन कपूर के मुताबिक इस बार गर्मी में 300 से 400 शव प्रतिदिन आ रहे हैं। ऐसे में घाट पर आने वाले शवों को दाह संस्कार के लिए 3 से 4 घंटे का इंतजार से करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते मरने वालों का आंकड़ा बढ़ा है। जिनमें बजुर्गों की संख्‍या ज्‍यादा है। बता दें कि मणिकर्णिका घाट पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए पूर्वांचल समेत कई जिलों के साथ वाराणसी के दूर-दराज इलाकों से भी लोग आते हैं। हालांकि यहां विद्युत शवदाह गृह होने से लोगों को थोड़ी राहत है लेकिन शवों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रत्यक्षदर्शी की माने तो पूरे घाट की सीढ़ियों पर ऊपर से लेकर नीचे तक लाशें इकट्ठी हुई हैं। लेकिन चिता जलाने की जगह काफी मुश्किलों से नसीब हो रही है।

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घंटों करना पड़ रहा इंतजार: काशी में सदियों से मोक्ष की कामना लिए लोग देश-विदेश से लोग यहां अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। अमूमन यहां एकबार में 1 से 18 लाशें जलाईं जाती हैं। जिनके जलने में करीब 3 से 4 घंटे का समय लग जाता हैं। लेकिन अब जब लाशों की संख्या बढ़ गई है और घाटों पर अतिरिक जगह भी नहीं है तो अंतिम संस्कार के लिए आए लोगो को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। मणिकर्णिका घाट पर लगे लाशों की कतार के चलते कई लोगों ने यहां टोकन वितरण एवं नम्बर की व्यवस्था लागू करने की बात कही है।

सदियों से वसूला जाता है टैक्स: बता दें कि सदियों से मणिकर्णिका घाट हो या फिर हरिश्चंद्र घाट दोनों ही जगहों पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए बकायदा परिजनों से टैक्स लिया जाता है। आर्थिक हालत देखकर टैक्स का निर्धारण किया जाता है। यहां के डोमराजा जगदीश चौधरी के मुताबिक मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की कीमत चुकाने की परम्परा तकरीबन तीन हजार साल पुरानी है, जो राजा हरिश्चंद्र के जमाने से शुरू हुई थी।

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