Chhanbey Assembly Seat: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित मिर्जापुर जिले की छानबे (अनुसूचित जाति सुरक्षित) विधानसभा सीट राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। सामाजिक समीकरण, कोल समुदाय का प्रभाव और भाजपा-अपना दल (एस), समाजवादी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी के बीच होने वाले मुकाबलों के कारण यह सीट हर चुनाव में चर्चा का केंद्र रहती है।
मिर्जापुर जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं – मिर्जापुर नगर, मझवां, चुनार, मड़िहान और छानबे (अनुसूचित जाति)। इनमें छानबे विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पिछले एक दशक में इस सीट पर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं। कभी समाजवादी पार्टी और बसपा के बीच मुकाबला रहने वाली इस सीट पर अब भाजपा और उसके सहयोगी दल अपना दल (सोनेलाल) का मजबूत प्रभाव दिखाई देता है।
2023 के उपचुनाव ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा
वर्ष 2023 में तत्कालीन विधायक राहुल प्रकाश कोल के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने अपना दल (एस) की ओर से राहुल कोल की पत्नी रिंकी कोल को उम्मीदवार बनाया, जबकि समाजवादी पार्टी ने कीर्ति कोल को मैदान में उतारा।
करीबी मुकाबले में रिंकी कोल ने 76,203 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी की कीर्ति कोल को 66,616 वोट मिले। रिंकी कोल ने 9,587 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर गठबंधन की सीट बरकरार रखी।
छानबे विधानसभा उपचुनाव 2023
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|---|
| रिंकी कोल (विजेता) | अपना दल (सोनेलाल) | 76,203 |
| कीर्ति कोल | समाजवादी पार्टी | 66,616 |
जीत का अंतर: 9,587 वोट
2022 में राहुल प्रकाश कोल ने दिलाई जीत
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन के तहत अपना दल (सोनेलाल) के उम्मीदवार राहुल प्रकाश कोल ने समाजवादी पार्टी की कीर्ति कोल को हराया था। राहुल प्रकाश कोल को 1,02,502 वोट मिले, जबकि कीर्ति कोल को 64,389 वोट प्राप्त हुए। जीत का अंतर 38,113 वोट रहा।
छानबे विधानसभा चुनाव परिणाम 2022
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|---|
| राहुल प्रकाश कोल (विजेता) | अपना दल (सोनेलाल) | 1,02,502 |
| कीर्ति कोल | समाजवादी पार्टी | 64,389 |
जीत का अंतर: 38,113 वोट
2017 में अपना दल (एस) ने बनाई मजबूत पकड़
2017 के विधानसभा चुनाव में भी यह सीट भाजपा गठबंधन के खाते में गई। अपना दल (सोनेलाल) के उम्मीदवार राहुल प्रकाश ने 1,07,007 वोट प्राप्त कर बहुजन समाज पार्टी के धनेश्वर को हराया। धनेश्वर को 43,539 वोट मिले। राहुल प्रकाश ने 63,468 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी।
छानबे विधानसभा चुनाव परिणाम 2017
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|---|
| राहुल प्रकाश (विजेता) | अपना दल (सोनेलाल) | 1,07,007 |
| धनेश्वर | बहुजन समाज पार्टी | 43,539 |
जीत का अंतर: 63,468 वोट
2012 में समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी सीट
2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के भाई लाल कोल ने 57,488 वोट हासिल कर बहुजन समाज पार्टी के शशि भूषण को हराया था। शशि भूषण को 47,194 वोट मिले। भाई लाल कोल ने 10,294 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
छानबे विधानसभा चुनाव परिणाम 2012
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|---|
| भाई लाल कोल (विजेता) | समाजवादी पार्टी | 57,488 |
| शशि भूषण | बहुजन समाज पार्टी | 47,194 |
जीत का अंतर: 10,294 वोट
कोल समुदाय और दलित वोट बैंक की अहम भूमिका
छानबे विधानसभा क्षेत्र में कोल समुदाय और अन्य अनुसूचित जाति के मतदाताओं का बड़ा प्रभाव माना जाता है। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के मतदाता भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दल सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन करते हैं।
विकास के मुद्दे भी रहते हैं अहम
इस विधानसभा क्षेत्र में सड़क, सिंचाई, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, रोजगार और ग्रामीण आधारभूत ढांचे का विकास चुनावी मुद्दों में प्रमुख रहता है। विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर मतदाताओं की अपेक्षाएं लगातार बनी हुई हैं।
2027 में फिर रहेगी सबकी नजर
छानबे विधानसभा सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनाव और एक उपचुनाव में लगातार अपना दल (सोनेलाल)-भाजपा गठबंधन को सफलता मिली है। वहीं समाजवादी पार्टी इस सीट पर अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश में है।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में यह सीट एक बार फिर पूर्वांचल की सबसे चर्चित सीटों में शामिल रहने की संभावना है। भाजपा गठबंधन जीत का सिलसिला जारी रखता है या विपक्ष वापसी करता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।
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उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में काशी और प्रयागराज के बीच विंध्य पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा मिर्जापुर जिला धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से खास महत्व रखता है। मां विंध्यवासिनी धाम के कारण इसे विंध्यधाम के नाम से भी जाना जाता है। आजादी के आंदोलन से लेकर प्रदेश की राजनीति तक, मिर्जापुर ने कई बड़े नेताओं को जन्म दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
