उत्तर प्रदेश की अलीगंज विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव में एक बार फिर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यहां लगातार जीत दर्ज की है जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) इस सीट पर अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश करेगी।

अलीगंज विधानसभा सीट एटा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस सीट पर लोधी, यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण, ठाकुर और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाता चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। 2022 के चुनाव में भाजपा और सपा के बीच बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिली थी जिसमें भाजपा ने महज 3810 वोटों से जीत दर्ज की थी। ऐसे में 2027 का मुकाबला और भी रोचक होने की संभावना है।

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पिछले चार चुनावोंं में अलीगंज सीट पर किसका कब्जा

वर्षविजेता उम्मीदवारपार्टीकुल वोट
2022सत्यपाल सिंह राठौरभाजपा1,02,873
2017सत्यपाल सिंह राठौरभाजपा88,695
2012रामेश्वर सिंह यादवसमाजवादी पार्टी91,141
2007अवधपाल सिंह यादवबसपा57,149
2002रामेश्वर सिंह यादवसमाजवादी पार्टी44,045

2022 विधानसभा चुनाव परिणाम

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सत्यपाल सिंह राठौर ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के रामेश्वर सिंह यादव को 3810 वोटों से हराया।

क्रमपार्टीउम्मीदवारकुल वोट
1भारतीय जनता पार्टी (BJP)सत्यपाल सिंह राठौर1,02,873
2समाजवादी पार्टी (SP)रामेश्वर सिंह यादव99,063
3बहुजन समाज पार्टी (BSP)सऊद अली खान उर्फ जुनैद मियां17,751
4जन अधिकार पार्टीकैलाश लोधी1,652

2017 विधानसभा चुनाव परिणाम

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सत्यपाल सिंह राठौर ने समाजवादी पार्टी के रामेश्वर सिंह यादव को 13,851 वोटों से हराकर पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी।

क्रमउम्मीदवारपार्टीकुल वोटवोट प्रतिशत
1रामेश्वर सिंह यादवसमाजवादी पार्टी91,14145.63%
2संघमित्रा मौर्यबहुजन समाज पार्टी65,12032.60%
3नीरज किशोरजनक्रांति पार्टी (JaKP)24,53512.28%

2012 विधानसभा चुनाव परिणाम

2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के रामेश्वर सिंह यादव ने बसपा की संघमित्रा मौर्य को 26,021 वोटों से हराकर सीट अपने नाम की थी।

क्रमउम्मीदवारपार्टीकुल वोटवोट प्रतिशत
1रामेश्वर सिंह यादवसमाजवादी पार्टी91,14145.63%
2संघमित्रा मौर्यबहुजन समाज पार्टी65,12032.60%
3नीरज किशोरजनक्रांति पार्टी (JaKP)24,53512.28%

अलीगंज विधानसभा सीट का सामाजिक समीकरण

अलीगंज विधानसभा सीट का चुनावी समीकरण यादव बनाम गैर-यादव OBC की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। यहां यादव मतदाता प्रभावशाली माने जाते हैं और परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी का मजबूत आधार रहे हैं। हालांकि केवल यादव वोटों के दम पर इस सीट पर जीत आसान नहीं रही है।

भाजपा ने 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज कर यह साबित किया कि अगर शाक्य, लोधी, पाल, कुशवाह जैसे गैर-यादव OBC, सवर्ण (ब्राह्मण-ठाकुर) और अनुसूचित जाति के मतदाताओं का समर्थन एकजुट रहता है तो वह इस सीट पर मजबूत स्थिति में रहती है।

वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त मिलने से संकेत मिला कि अगर सपा यादव और मुस्लिम वोटों के साथ शाक्य तथा अन्य गैर-यादव OBC मतदाताओं का एक हिस्सा अपने पक्ष में करने में सफल होती है तो मुकाबला बेहद कड़ा हो सकता है।

2022 में भाजपा की जीत का अंतर सिर्फ 3810 वोट रहा था। इससे साफ है कि इस सीट पर छोटे सामाजिक समूहों का रुझान भी परिणाम बदलने की क्षमता रखता है। ऐसे में शाक्य, लोधी, पाल, कुशवाह और अनुसूचित जाति के वोट 2027 के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

कुल मिलाकर कहें तो अलीगंज को किसी एक दल की पूरी तरह सुरक्षित सीट नहीं माना जा सकता। भाजपा यहां लगातार दो चुनाव जीत चुकी है लेकिन अगर विपक्ष सामाजिक समीकरण साधने और उम्मीदवार चयन में बढ़त बना लेता है तो 2027 में मुकाबला बेहद रोचक और करीबी होने की संभावना है।

2027 में किस पर रहेगी नजर?

अलीगंज सीट पर 2027 में भाजपा की कोशिश लगातार तीसरी जीत दर्ज करने की होगी। वहीं, समाजवादी पार्टी 2022 की करीबी हार को जीत में बदलने की रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी। अगर बसपा और अन्य दल मजबूत उम्मीदवार उतारते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय भी हो सकता है। ऐसे में जातीय समीकरण, उम्मीदवार का स्थानीय प्रभाव और संगठन की मजबूती इस सीट पर जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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