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ताजमहल के बदलते रंग को लेकर बढ़ी चिंता, संरक्षण के लिए हो सकता है ‘वाष्प तकनीक’ का इस्तेमाल

एक साल में चार से पांच बार इन कीटों का ताजमहल पर हमला होता है। इसका कारण जानने के लिए कुछ समय पहले भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण ने एक अध्ययन किया था।

Author May 7, 2018 5:06 AM
विश्व धरोहर स्मारक ताजमहल (फाइल फोटो)

विश्व धरोहर ताजमहल के बदलते रंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट की चिंताओं के बीच इस वैश्विक स्मारक के संरक्षण के लिए ‘वाष्पीकरण और माइक्रो वेपर ब्लास्ंटिग तकनीक’ के उपयोग की संभावना तलाशी जा रही है। इस तकनीकी का उपयोग हाल ही में संसद भवन के संरक्षण कार्य में किया गया है।
संसद भवन में संरक्षण के कार्य में वाष्प तकनीकी का उपयोग करने वाले केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के सूत्रों ने बताया कि भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण ने वाष्प व माइक्रो वेपर ब्लास्ंटिग तकनीक के अनुभवों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए विभाग से संपर्क किया था और यह जानना चाहा था कि ताजमहल के संदर्भ में इसका किस प्रकार से उपयोग किया जा सकता है।

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के सूत्रों ने बताया कि ताजमहल के संगमरमर के रंग बदलने के कारणों की जांच के लिए 27 मई, 2016 को आगरा के तत्कालीन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था। इस समिति में पुरातत्त्व विभाग के आगरा क्षेत्र के अधीक्षण रसायन विशेषज्ञ डॉ. एमके भटनागर सदस्य थे। डॉ भटनागर ने बताया कि ताजमहल पर बार-बार लगने वाले धब्बों का सबसे बड़ा कारण यमुना का प्रदूषित पानी है । जब तक इस समस्या का समाधान नहीं होगा तब तक ताजमहल की दीवारों पर लगे धब्बों को स्थाई तौर पर नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि कीड़ों की प्रजाति गोल्डीचिरोनोमस है जो बार-बार ताज की बाहरी दीवारों पर हमला करती है। एक साल में चार से पांच बार इन कीटों का ताजमहल पर हमला होता है। इसका कारण जानने के लिए कुछ समय पहले भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण ने एक अध्ययन किया था। अध्ययन में पता चला कि ये कीट यमुना के प्रदूषित पानी में पलते हैं और वहां से आकर ताजमहल की बाहरी दीवारों पर बैठते हैं। चूंकि एएसआइ ताजमहल के बाहर कुछ नहीं कर सकती। इसलिए इस अध्ययन की रपट जिला प्रशासन को भेजी गई थी। जिला प्रशासन से कहा गया था कि यमुना नदी में पानी का स्तर बढ़ाते हुए पानी के प्रवाह को तेज किया जाए और उसे साफ करने की पहल की जाए। समिति ने सुझाव दिया था कि चूंकि कीड़े रात के समय और कृत्रिम प्रकाश में अधिक सक्रिय होते हैं, अत: ताजमहल पर रात के समय प्रकाश की व्यवस्था को प्रतिबंधित किया जाए।

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सुप्रीम कोर्ट ने विश्व धरोहर ताजमहल के बदलते रंग पर चिंता व्यक्त करते हुए कुछ ही दिन पहले कहा था कि सफेद रंग का यह स्मारक पहले पीला हो रहा था लेकिन अब यह भूरा और हरा होने लगा है। ऐसे में भारतीय और विदेशी विशेषज्ञों की मदद से नुकसान का आकलन और इस ऐतिहासिक स्मारक का मूल रूप बहाल करने के लिए कदम उठाए जाएं। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, उत्तरी क्षेत्र से प्राप्त से जांच समिति की रपट में कहा गया है कि ताजमहल के संगमरमर की सतह पर हरे और काले धब्बे कीड़ों की गतिविधियों के कारण उभरे हैं और इससे ताजमहल का रंग फीका हो रहा है। रपट में एएसआइ के अधीक्षण पुरातत्त्व रसायन विशेषज्ञ डॉ. एमके भटनागर ने कहा था कि ताजहमल के संगमरमर की सतह पर कीड़ों की गतिविधियों को कम करने के लिए कुछ जांच की गई हैं। उपयुक्तअनुपात में कुछ तत्त्वों का घोल तैयार किया गया और प्रकाश में रात के समय ताजमहल में रखा गया। इसके कारण झुंड के झुंड कीड़े इसमें चिपके पाए गए। ताजमहल की खूबसूरती को सुरक्षित रखने के लिए 2015 के बाद से चार बार ‘मड पैकिंग’ (मिट्टी का लेप) का कार्य किया गया है।

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