छोटे से गांव का वो लड़का जिसने हिन्दी को अपनाया और बन गया IAS, पहली बार में मिला था IPS

राजस्थान के रहने वाले विकास मीणा (Vikas meena) ने हिन्दी माध्यम से पहली बार में ही यूपीएससी (UPSC) क्लियर कर लिया था। आईपीएस (IPS) के लिए चुन भी लिए गए थे, लेकिन उन्हें आईएएस (IAS)बनाना था, इसलिए दोबारा से परीक्षा दी और सफल भी हुए।

ias vikas meena
IAS विकास मीणा (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट Delhi Knowledge Track)

भाषा कभी भी सफलता के आड़े नहीं आती है। यूपीएससी (UPSC) की तैयारी के दौरान ज्यादातर छात्र हिन्दी लेने से डरते हैं। ऐसी धारणा है कि हिन्दी माध्यम से यहां सफलता नहीं मिलती है, लेकिन इस धारणा को अब तक कई लोग तोड़ चुके हैं। इन्हीं लोगों में विकास मीणा (IAS Vikas Meena) का नाम शामिल है।

विकास मीणा राजस्थान के एक छोटे से गांव से आते हैं। विकास ने हिन्दी मीडियम से ही एक बार नहीं, दो-दो बार यूपीएससी क्लियर कर दिखाया है। पहली बार में विकास को आईपीएस के लिए चुना गया, लेकिन आईएएस का सपना देख रहे विकास ने फिर से एग्जाम दिया और यूपीएससी क्लियर करके आईएएस के लिए चुने गए।

राजस्थान के महवा में जन्म लेने वाले विकास (IAS Vikas Meena) ने प्रारंभिक पढ़ाई अपने गांव में ही की। 12वीं के बाद ग्रेजुएशन के लिए वो जयपुर आ गए। ग्रेजुएशन खत्म करने के बाद विकास अपने भाई के साथ यूपीएससी (UPSC) की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए। विकास जब दिल्ली पहुंचे तो हिन्दी को लेकर छात्रों के मन में बड़ा डर देखा, लेकिन विकास इससे घबराए नहीं बल्कि हिन्दी को ही अपना मुख्य हथियार बना लिया।

विकास बचपन से ही पढ़ने में तेज थे और हिन्दी पर उनकी पकड़ काफी अच्छी थी। दिल्ली में विकास रणनीति बनाकर यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में जुट गए। पहली ही बार में विकास सफल रहे और उन्हें आईपीएस के लिए चुन लिया, लेकिन विकास का मन पुलिस विभाग में जाने को तैयार नहीं हुआ। उनका सपना तो आईएएस (IAS) बनने का था।

विकास फिर से तैयारी में जुट गए। अगली बार फिर से परीक्षा दी और इस बार भी उन्होंने यूपीएससी क्लियर कर लिया। 2017 में जब विकास दोबारा चुने गए तो उन्हें उनके मन के मुताबिक ही सेलेक्शन हो गया। उन्हें इस बार आईएएस के लिए चुन लिया गया।

विकास मीणा (IAS Vikas Meena) के परिवार का ही सपना था कि वो यूपीएससी निकालें। पिता के निर्णय पर रिश्तेदारों और आस-पड़ोस वालों ने एतराज भी जताया लेकिन वो अड़े रहे। विकास भी अपने पिता के सपनों पर खड़े उतरे और उन्होंने पिता का सपना सच कर दिखाया।

सफलता मिलने के बाद विकास ने कहा कि हिन्दी को लेकर गलत धारणा बनी हुई है। ऐसा नहीं है कि हिन्दी माध्यम वालों को सफलता नहीं मिलती है। इसके लिए आपको फोकस होकर मेहनत करना पड़ता है।

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