देश के वो बड़े नेता जो पहले थे IAS, राजनीति में आने के बाद कोई बने CM तो किसी ने संभाली वित्त मंत्रालय की कमान

जयप्रकाश नारायण, अल्फोंस कन्ननथनम, केपी रमैया… ये तो कुछ नाम हैं, जिन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नौकरी के बाद राजनीति की राह पकड़ ली। ऐसे नामों की लिस्ट लंबी है जो सिविल सर्विस की नौकरी के बाद नेता बन गए। इनमें से कुछ सफल हुए तो कुछ असफल भी रहे।

IAS who join politics
अजीत जोगी और यशवंत सिन्हा समेत कई आईएएस राजनीति में जा चुके हैं (फोटो-इंडियन एक्सप्रेस)

देश में ऐसे नेताओं की लिस्ट लंबी है जो पहले आईएएस (IAS) थे और आज एक सफल राजनीतिज्ञ है। शासन व्यवस्था को चलाने में आईएएस हमेशा नेताओं और राजनीति के बीच काम करते रहते हैं, और शायद यही कारण है कि वो कई बार राजनीति की ओर आकर्षित हो जाते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि खुद नेता ही आगे बढ़कर अधिकारी को राजनीति में ले आते हैं।

यशवंत सिन्हा, अजीत जोगी और शाह फैसल जैसे कई नाम हैं जो सिविल सर्विस की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर राजनीति में उतर आए। इनमें तो कई ने बड़े मुकाम हासिल कर लिए तो कई नाकामयाब होकर राजनीति ही छोड़ दी।

IAS यशवंत सिन्हा- यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) उन पुराने अधिकारियों में से एक हैं, जो आजादी के बाद सिविल सर्विस की नौकरी छोड़कर राजनीति में उतर आए थे। पटना में पैदा हुए सिन्हा 1960 में आईएएस के लिए चुने गए थे। 1984 तक उन्होंने ये नौकरी की। इस दौरान वो 4 सालों तक सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किए। सिन्हा बिहार सरकार के वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी भी रहे। इसके बाद वो केंद्र में पहुंच गए, जहां उन्होंने कॉमर्स मंत्रालय में उप सचिव के रूप में काम किया।

यशवंत सिन्हा 1984 तक कई विभागों में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में काम किया। 1984 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्हें 1986 में पार्टी का अखिल भारतीय महासचिव नियुक्त किया गया। इसके बाद वो 1988 में राज्यसभा के लिए चुने गए। 1989 में जब जनता दल का गठन हुआ तो उन्हें पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया। इसके बाद जब चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने तो यशवंत सिन्हा को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।

जनता दल का जब बिखराव हुआ तो यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी तो उन्हें इसबार विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। 2018 में मतभेदों के कारण उन्होंने बीजेपी से किनारा कर लिया। फिलहाल यशवंत सिन्हा तृणमूल कांग्रेस में हैं।

IAS अजीत जोगी- अजीत जोगी (Ajit Jogi) जब नौकरी छोड़ राजनीति में उतरे तो वो छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए। अविभाजित मध्यप्रदेश में कई सालों की नौकरी करने के बाद अजीत जोगी ने नौकरी छोड़कर, राजनीति के मैदान में उतर गए थे। जोगी पहले आईपीएस के लिए चुने गए थे, नौकरी भी की और फिर यूपीएसएसी की परीक्षा दी और आईएएस के लिए चुन लिए गए।

मध्यप्रदेश में नौकरी के दौरान अजीत जोगी तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के करीब आ गए। अर्जुन सिंह की सलाह पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी उन्हें राजनीति में ले आए। कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। इसके बाद जब छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश से अलग हुआ और कांग्रेस को राज्य में बहुमत मिल गई, तब अजीत जोगी को पार्टी ने मुख्यमंत्री पद की कुर्सी सौंप दी।

इसके बाद वो कई विवादों में रहे। कांग्रेस से निलंबन भी हुआ और वापसी भी, लेकिन तबतक अजीत जोगी अपनी चमक खो चुके थे। 2016 में उन्होंने खुद की पार्टी बनाई, लेकिन सफल नहीं रहे। मई 2020 को उन्होंने आखिरी सांस ली और स्वर्ग को सिधार गए।

IAS आर के सिंह- राज कुमार सिंह जो आर के सिंह (RK Singh) के नाम से ज्यादा जाने जाते हैं। आज की तारीख में वो केंद्र में उर्जा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सिंह 1975 बैच के बिहार-कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी हैं। सिंह ने 1974 में एक भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी के रूप में अपना करियर शुरू किया और 1975 में एक आईएएस अधिकारी बने। वह 1981 से 1983 तक पूर्वी चंपारण के जिला मजिस्ट्रेट और 1983 से 1985 तक पटना के जिला मजिस्ट्रेट भी रहे।

आर के सिंह उस समय बहुत चर्चित हुए जब वो समस्तीपुर के जिलाधिकारी रहते हुए भाजपा नेता एल.के. आडवाणी को उनकी रथ यात्रा के दौरान गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद सिंह कई विभागों में वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर काम करते हुए केंद्रीय गृहमंत्रालय पहुंचे, जहां उन्होंने गृह सचिव के रूप में काम किया।

रिटायरमेंट के बाद सिंह 2013 में भाजपा में शामिल हो गए। बिहार के आरा से वो दो बार सांसद बन चुके हैं। आर के सिंह फिलहाल केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

IAS शाह फैसल- 2010 बैच के आईएएस अधिकारी शाह फैसल (Shah Faesal) ने करीब 9 साल नौकरी की। 2019 में कश्मीर की हालत को देखते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया और राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया। इसके लिए उन्होंने बकायदा ‘जम्मू और कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट’ नाम की पार्टी भी बना ली थी।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करने वाले पहले कश्मीरी, शाह फैसल (Shah Faesal) के लिए राजनीति आसान नहीं रही। शाह फैसल कई बार विवादों में भी रहे। जम्मू-कश्मीर से 370 के हटने के बाद शाह फैसल भी उन नेताओं में शामिल थे जिन्हें सरकार ने हिरासत में ले लिया था। उनकी पार्टी जेकेपीएम ने अगस्त 2020 को घोषणा की, कि फैसल अब पार्टी छोड़ चुके हैं। फैसल ने पार्टी को जानकारी देते हुए कहा कि वो अब राजनीति में नहीं रह सकते हैं। इसलिए उन्हें पद मुक्त कर दिया जाए।

IAS वीएस चंद्रलेखा- चंद्रलेखा (v s chandralekha) 1971 में आईएएस बनीं और तमिलनाडु के चेंगलपट्टू के सब-कलेक्टर के रूप में उन्हें नियुक्ति मिली। टिडको के एमडी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उनका तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता से मतभेद हो गया। कहा जाता है कि इसी के कारण चंद्रलेखा पर चेन्नई में एसिड अटैक हुआ था। एसिड अटैक के बाद चंद्रलेखा ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सुब्रमण्यम स्वामी के नेतृत्व वाली जनता पार्टी में शामिल हो गई। ये चुनाव भी लड़ीं, लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई। फिलहाल ये बीजेपी में हैं।

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