आईआईटी दिल्ली के हौज खास पोस्ट ऑफिस में न तो उदास करने वाली दीवारें हैं और न ही सख्त कुर्सियों की कतारें। इसके बजाय, दीवार जितनी बड़ी कांच की खिड़कियों से सूरज की रोशनी अंदर आती है और एक कोने में कॉफी मशीन रखी है। यहां गुलाबी कुशन वाली कुर्सियां, गमले में लगे पौधे और यहां तक कि एंट्री के पास वाली दीवार पर “दैट्स सो IIT दिल्ली” नाम की एक पेंटिंग भी है।

पिछले साल इसे भारत के पहले जेन-जी पोस्ट ऑफिस के तौर पर डिजाइन किया गया था। यह कोशिश थी कि पारंपरिक और सरकारी कामकाज वाली जगह को युवाओं के लिए ज्यादा स्वागत करने लायक बनाया जाए और उन्हें चिट्ठी-पत्री और स्टैम्प के अलावा दूसरी सेवाओं से भी परिचित कराया जाए।

शनिवार की दोपहर 31 साल के रवींद्र कुमार अपनी 11 साल की बेटी काव्या के साथ काउंटर पर खड़े थे। काव्या ने स्कूल यूनिफॉर्म पहनी हुई थी और वे अपने आधार कार्ड अपडेट करवाने आए थे। कुमार पहली बार लगभग छह महीने पहले पोस्ट ऑफिस आए थे। उन्होंने कहा, “यहां आना हमेशा अच्छा लगता है। मुझे कभी नहीं लगता कि यहां आना कोई परेशानी का काम है।”

मेकओवर की झलक

एक दीवार और छत पर लाल रंग के पैनल लगे हैं। बाकी दीवारें उनसे मेल खाती सफेद रंग की हैं। लाल और सफेद डेस्क के पीछे, एक सफेद दीवार पर डूडल म्यूरल बना है, इसमें इंसानों की आकृतियां, बिल्लियां, पिज्जा, बर्गर और इंडिया गेट व कुतुब मीनार के स्केच के बीच बनी मोना लिसा की तस्वीर है। जिन आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने इसे बनाया है, उनके नाम दीवार के कोने में लाल रंग से लिखे गए हैं।

वहां एक फ्रेम की हुई तस्वीर भी है जिसमें दिखाया गया है कि पोस्ट ऑफिस पहले कैसा दिखता था और अब कैसा दिखता है। पार्सल तौलने वाली मशीन एक पारदर्शी डिस्प्ले केस के बगल में रखी है। इसमें पोस्ट ऑफिस का सामान जैसे बोतलें और फ्रिज मैग्नेट रखे हैं।

एक साल और नौ महीने की अक्षिता को इसके बटन दबाने में अपना ही मनोरंजन मिल रहा था, जबकि उसके पिता मनोरंजन बदित्या, उसे सुकन्या समृद्धि योजना में नामांकित करने के लिए फॉर्म भर रहे थे। उनकी पत्नी हेमांगी और चार साल का बेटा रुद्रज कुर्सियों पर बैठे थे। हेमांगी ने कहा, “जब हम यहां आते हैं, तो हम बिना किसी चिंता के अपने बच्चों को ला सकते हैं, कोई रोक-टोक नहीं होती। हमारे बच्चे जैसे हैं वैसे रह सकते हैं और कोई शिकायत नहीं करता।”

उन्होंने कहा, “यहां आकर माइंड फ्रेश हो जाता है।” यह पोस्ट ऑफिस आम डाक और पोस्टल सेवाओं के साथ-साथ फाइनेंशियल और इंश्योरेंस सेवाएं और आधार की सुविधा भी देता है। यहां इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और तरह-तरह के हेरिटेज स्टैम्प वाला फिलाटेली काउंटर भी है।

कब से कब तक खुला रहता है पोस्ट ऑफिस

लाल-सफेद डेस्क के पीछे दो कर्मचारी हैं, पोस्टल असिस्टेंट पूजा यादव और एमटीएस वर्कर आदर्श यादव। यह पोस्ट ऑफिस सोमवार से शनिवार तक सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है। रविवार को यह शाम 4 बजे बंद हो जाता है। एक अन्य विजिटर मेनका सिंह आईआईटी में न्यूरोसाइंस में पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने शहर के दूसरे पोस्ट ऑफिस में अपने अनुभव को याद किया, लंबी लाइनें, कभी भी बंद हो जाना और लंबा इंतजार। उन्होंने कहा कि यहां के कर्मचारी इतने मिलनसार हैं कि मैं बस उन्हें मैसेज करके पूछ सकती हूं कि क्या पोस्ट ऑफिस खुला है।

उन्होंने आगे कहा, “यह बिल्कुल भी नौकरशाही जैसा नहीं लगता। मैं बस जाती हूं और अपना काम करवा लेती हूं। मैं यूपीआई के जरिये भुगतान कर सकती हूं। नकद भुगतान की कोई बाध्यता नहीं है।” 38 साल के पोस्टमास्टर मनेंद्र सिंह रावत का कहना है कि यह सुगमता जानबूझकर की गई है।

‘जेन-जी पोस्ट ऑफिस क्यों?

यह आइडिया पिछले साल जुलाई में आया था। इसे लागू करने से पहले कई महीनों तक छात्रों और फैकल्टी के साथ बैठक हुई। सितंबर में काम शुरू हुआ और अक्टूबर-नवंबर तक पूरा हो गया। रावत ने बताया, “यह असल में जेन-जी के लिए एक पहल थी।”

उन्होंने कहा कि यह उस पीढ़ी के लिए था जो पोस्ट ऑफिस को सिर्फ चिट्ठियों से जोड़कर देखती थी और वहां मिलने वाली सेविंग्स स्कीम, पार्सल सर्विस और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के बारे में नहीं जानती थी। इस नई जगह का उद्घाटन इंडिया पोस्ट के पहले जेन-जी थीम वाले कैंपस पोस्ट ऑफिस के तौर पर किया गया। यह 15 दिसंबर 2025 तक एजुकेशनल कैंपस में मौजूद 46 पोस्ट ऑफिस को नया रूप देने की देशव्यापी योजना का हिस्सा है।

वाई-फाई जोन और क्यूआर बेस्ड पार्सल बुकिंग की सुविधा

यह पहल संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिधिंया की सोच का नतीजा थी। उनका मकसद पोस्ट ऑफिस को युवाओं के लिए खास जगहों में बदलना था। इसमें वाई-फाई जोन, क्यूआर-बेस्ड पार्सल बुकिंग, स्टूडेंट्स के लिए स्पीड पोस्ट पर डिस्काउंट और आईआईटी फाइन आर्ट्स सोसाइटी का बनाया वॉल आर्ट शामिल है। रावत ने कहा, “केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने जनवरी 2026 में आईआईटी दिल्ली पोस्ट ऑफिस का दौरा किया था और अब उनके साइन इस ऑफिस के छोटे से इतिहास का हिस्सा बन गए हैं।”

आंकड़े इस बदली हुई सोच की पुष्टि करते हैं। यहां पर आने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़कर 40-50 प्रतिदिन हो गई है। छात्र ग्रेजुएशन के बाद अपना सामान घर भेजने के लिए पार्सल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, जबकि पीएचडी स्कॉलर एकेडमिक पदों के लिए स्पीड पोस्ट से आवेदन भेजने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।

रावत ने आगे कहा, “ज्यादातर छात्रों की क्लास शाम 5 बजे के आसपास खत्म होती है, इसलिए हमने पोस्ट ऑफिस को उनके लिए सुलभ बनाने के लिए इसके खुलने का समय बढ़ाने का फैसला किया।”

नालंदा हॉस्टल में रहने वाली एमएससी केमिस्ट्री की फर्स्ट ईयर की छात्रा आकांक्षा गायकवाड़ ने कहा कि हॉस्टल के पास पोस्ट ऑफिस होने से उन्हें फायदा होता है। उन्होंने कहा, “मुझे अपनी डिलीवरी के लिए कभी ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता और अगर मुझे किसी चीज में परेशानी होती है, तो वे उसे समझाते भी हैं।” लेकिन इससे सिर्फ छात्रों को ही फायदा नहीं हुआ।

आईआईटी दिल्ली की पूर्व छात्रा और एक फैकल्टी मेंबर की पत्नी स्वप्ना मिश्रा ने कहा कि इस बदलाव से एक पर्सनल टच आया है। उन्होंने इस ऑफिस का इस्तेमाल सेविंग्स अकाउंट, आरडी और एमआईएस के लिए किया है और अब वह अपनी घरेलू सहायिका के लिए भी एक अकाउंट खुलवा रही हैं।

उन्हें याद है कि पोस्ट ऑफिस हमेशा मददगार रहा है, लेकिन बहुत सरकारी तरीके से चलता था। लगभग एक महीने बाद लौटने पर उन्होंने बताया कि रावत को अभी भी याद था कि वह कौन हैं। उन्होंने कहा, “यहां एक पर्सनल टच है, स्टाफ यह पक्का करता है कि लोग जुड़ा हुआ महसूस करें।”

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आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में शनिवार को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र-छात्राओं को डिग्री और मेडल प्रदान किए। इस मौके पर एक अवसर ऐसा भी आया जब उनकी बात सुनकर सारे छात्र-छात्राएं हंसने लगें। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…