उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच योगी सरकार ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बड़ा ऐलान किया।

उन्होंने कहा कि 1 किलोवाट तक के घरेलू प्रीपेड मीटर अब सामान्य पोस्टपेड मीटर की तरह काम करेंगे। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था की वजह से गरीब और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसी वजह से नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

नया नियम क्या है?

सरकार के मुताबिक 1 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ता 30 दिनों के भीतर कभी भी अपना प्रीपेड मीटर रिचार्ज करवा सकेंगे और इस दौरान उनकी बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी। इसके अलावा, राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 200 रुपये तक का नेगेटिव बैलेंस होने के बाद भी बिजली आपूर्ति जारी रहेगी।

दरअसल, पूरे उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर अव्यवस्था की शिकायतें सामने आ रही थीं। कई उपभोक्ताओं का बैलेंस नेगेटिव में चला गया था और उनकी बिजली भी काट दी गई थी। इस वजह से लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला और कई जिलों में विरोध प्रदर्शन भी हुए। इन हालातों के बीच सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए यह फैसला लिया है।

मूल समस्या क्या थी?

जनसत्ता ने जब इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार से बात की, तो उन्होंने कहा था कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर का विकल्प उपलब्ध है। ये बात हमने भी मिनिस्ट्री ऑफ पावर की एक मीटिंग में कही थी। हमने कहा था कि एक्ट में जब यह प्रावधान है तो फिर उपभोक्ता को कैसे इससे वंचित रखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश में 70 लाख बिजली कनेक्शन को बिना पूछे ही प्रीपेड मॉडल में कर दिया गया।

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